‘डेड इकॉनॉमी’ बयान पर राहुल गांधी की सहमति से कांग्रेस में मतभेद, भाजपा ने उठाए सवाल

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मुख्य बिंदु:

राहुल गांधी ने ट्रंप के बयान का समर्थन करते हुए कहा – “देश की अर्थव्यवस्था मृतप्राय है”

कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने बयान से असहमति जताई

भाजपा ने राहुल पर भारत की छवि खराब करने का आरोप लगाया

विपक्षी दलों ने केंद्र की आर्थिक नीतियों को जिम्मेदार ठहराया

विस्तृत समाचार:

🔹 राहुल गांधी ने ट्रंप के बयान का किया समर्थन

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत और रूस को “डेड इकॉनॉमी” कहा और इन देशों के उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की। इस टिप्पणी के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में ट्रंप का पक्ष लेते हुए कहा कि “वे जो कह रहे हैं, वह पूरी दुनिया जानती है।”

राहुल ने सरकार पर आरोप लगाया कि नोटबंदी, त्रुटिपूर्ण GST और पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने वाली नीतियों ने देश की अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।

🔹 कांग्रेस में ही उठी विरोध की आवाजें

राहुल के बयान के तुरंत बाद कांग्रेस के भीतर से ही अलग-अलग राय सामने आई। पार्टी के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला ने ट्रंप के “डेड इकॉनॉमी” वाले बयान को गलत बताते हुए भारत की आर्थिक स्थिति को बेहतर बताया। शशि थरूर ने भी परोक्ष रूप से असहमति जताते हुए कहा कि भारत के पास अमेरिका के टैरिफ के खिलाफ कई विकल्प हैं, और ऐसे समय में संतुलित प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

🔹 भाजपा का पलटवार

भाजपा ने राहुल गांधी के बयान को राष्ट्रविरोधी करार दिया। पार्टी प्रवक्ता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर कहा कि राहुल की “राजनीतिक विरासत ही मृतप्राय हो चुकी है, न कि देश की अर्थव्यवस्था।”

भाजपा नेताओं ने कहा कि राहुल विदेशी नेताओं के बयानों का उपयोग कर भारत की छवि धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

🔹 विपक्षी दलों की अलग राय

शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने ट्रंप की टिप्पणी को भारत के सम्मान के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नीतियां भारत को दबाने की कोशिश कर रही हैं, और केंद्र सरकार को इस पर सख्त प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

विश्लेषण:

राहुल गांधी के ट्रंप के बयान का समर्थन करने से कांग्रेस के भीतर वैचारिक टकराव सामने आया है। एक ओर जहां राहुल अर्थव्यवस्था की बदहाली पर सरकार को घेरने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं पार्टी के अन्य नेता इससे दूरी बनाते दिख रहे हैं।

इस मुद्दे ने न केवल सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बहस को तीखा किया है, बल्कि विपक्षी गठबंधन में भी मतभेद उजागर कर दिए हैं। वहीं भाजपा इसे अपने पक्ष में इस्तेमाल कर रही है, यह दर्शाने के लिए कि कांग्रेस नेतृत्व जिम्मेदार भूमिका नहीं निभा रहा।

निष्कर्ष:

राहुल गांधी की टिप्पणी से उपजा विवाद अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। जहां यह बयान सरकार की आर्थिक नीतियों पर एक गंभीर सवाल है, वहीं विपक्ष की एकजुटता पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है। ट्रंप की एक टिप्पणी से भारत की राजनीति में भीतर और बाहर दोनों स्तर पर हलचल मच गई है।

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