Report By: निखिल रस्तोगी…
देश के स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कर दिया कि देश अब तकनीक के मामले में भी आत्मनिर्भर बनेगा. उन्होंने अपने संबोधन में सुभांशु शुक्ला का नाम लिया और कहा कि देश का तिरंगा एक बार फिर से अन्तरिक्ष में गाड़ा गया है. लेकिन भारत सिर्फ आकाश या अन्तरिक्ष ही नहीं बल्कि पाताल यानी समुद्र की गहराइयों में भी देश के तिरंगे को गाड़ा गया है. ये कमाल किया है एक्वानौट यानी पानी के भीतर मिशन पर जाने वाले विशेषज्ञों ने. इतिहास में दर्ज किये गए इस एतिहासिक पल के बारे में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर ही जानकारी सामने आई.
कब रचा इतिहास…
इसे महज सय्योग ही कहें कि अंतरिक्ष में झंडा गाड़ने के महज़ एक महीने बाद भारत ने समुद्र की गहराई में भी नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया। इस महीने की शुरुआत में, भारत ने पहली बार अपने एक्वानॉट (पानी के भीतर मिशन पर जाने वाले विशेषज्ञ) को 5,000 मीटर गहराई तक भेजा। यह ऐतिहासिक अभियान भारत और फ्रांस की साझेदारी में हुआ।
5 और 6 अगस्त को, फ्रांस की खास पनडुब्बी “नौटायल” में दो भारतीय एक्वानॉट्स ने नॉर्थ अटलांटिक महासागर में एक-एक गहरी डुबकी लगाई। 5 अगस्त को राष्ट्रीय समुद्री प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT) के वैज्ञानिक राजू रमेश 4,025 मीटर गहराई तक गए, जबकि 6 अगस्त को भारतीय नौसेना के पूर्व कमांडर जतिंदर पाल सिंह ने 5,002 मीटर की ऐतिहासिक डुबकी लगाई।
इतिहास रचने वालों ने क्या बताया…
इंडियन नेवी के कमांडर जेपी सिंह ने डीप ओशन मिशन के तहत 5000 मीटर गहराई में जाकर वह कारनामा किया, जो अब तक किसी भारतीय ने नहीं किया था। कमांडर सिंह ने बताया कि पहले वे 670 मीटर तक जा चुके थे,लेकिन इस बार महज़ 2 डिग्री तापमान में पूरे 5 घंटे गहराई में रहना एक अलग ही अनुभव था। जैसे-जैसे वे नीचे जाते गए,अंधेरा और सन्नाटा बढ़ता गया और समुद्र की सतह से बिल्कुल अलग नज़ारे सामने आए। सिंह ने कहा कि “हमने अब तक समुद्र के 70% संसाधनों का अन्वेषण नहीं किया है। यह मिशन अंडरवाटर मिनरल्स और ब्लू इकोनॉमी में भारत के लिए गेमचेंजर साबित होगा।”
केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा—“एक ही समय में एक भारतीय अंतरिक्ष में और एक भारतीय गहरे समुद्र में…भारत की दोहरी विजय की शुरुआत हो चुकी है। आने वाले वर्षों में, अंतरिक्ष और समुद्र—दोनों क्षेत्रों से देश की आर्थिक विकास कहानी में नया मूल्य जुड़ने वाला है।”
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Deep Ocean Mission और ब्लू इकॉनमी में विशेष रुचि दिखाई है, और स्वतंत्रता दिवस के भाषणों (2022 व 2023) में इसका ज़िक्र किया।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. रविचंद्रन ने कहा— “यह डाइव Deep Ocean Mission का हिस्सा थी। इस मिशन का एक प्रमुख लक्ष्य है—ऐसी तकनीक विकसित करना जिससे हम समुद्र की सबसे गहरी जगहों पर इंसानों को ले जा सकें और वहाँ के संसाधनों का अध्ययन कर सकें।”
उन्होंने बताया कि फिलहाल भारतीय वैज्ञानिक फ्रांस की पनडुब्बी “Nautile” में कई और गहराई मिशन करेंगे, ताकि 2027 के अंत तक भारतीय पनडुब्बी Matsya 6000 में अपना गहरा डाइव मिशन सफलतापूर्वक कर सकें।
Deep Ocean Mission (समुद्रयान) को 2021 में केंद्र सरकार ने मंज़ूरी दी थी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में मानवयुक्त और मानव रहित पनडुब्बियों का निर्माण, गहरे समुद्र से खनन तकनीक, समुद्री जलवायु सेवाएँ, जैव विविधता अनुसंधान और समुद्र से ऊर्जा उत्पादन शामिल हैं। इसका लक्ष्य भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र और महाद्वीपीय शेल्फ से संसाधन हासिल करना है।
Matsya 6000 पनडुब्बी को तीन लोगों को 6,000 मीटर गहराई तक ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें 2.1 मीटर व्यास का टाइटेनियम एलॉय का मजबूत गोला होगा, जो बेहद उच्च दाब को झेल सकता है। यह वैज्ञानिक सेंसर, डेटा और वॉइस कम्युनिकेशन सिस्टम, और 96 घंटे तक आपातकालीन सहनशक्ति वाले सुरक्षा सिस्टम से लैस होगी।
अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो भारत उन चुनिंदा छह देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिनके पास मानवयुक्त गहरे समुद्र मिशन करने की क्षमता है।




