कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति की हालिया गिरफ्तारी पर चिंता जताई है। उन्होंने इसे “राजनीतिक बदले की भावना” से प्रेरित बताया और श्रीलंकाई सरकार से संयम बरतने की अपील की है।
थरूर का बयान:
थरूर ने कहा,
“लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन यदि सत्ता में आने के बाद बदले की राजनीति की जाती है, तो यह समाज को विभाजित करती है। श्रीलंका को इस समय सुलह और स्थिरता की आवश्यकता है, न कि राजनीतिक प्रतिशोध की।”
पूर्व राष्ट्रपति पर भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। वर्तमान सरकार ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है, जिसके तहत उनकी गिरफ्तारी की गई है। हालांकि, विपक्ष का दावा है कि यह गिरफ्तारी राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।
क्षेत्रीय राजनीति पर असर:
भारत समेत कई पड़ोसी देशों में इस घटना पर नजर रखी जा रही है। थरूर जैसे नेताओं की प्रतिक्रिया इस बात को दर्शाती है कि क्षेत्रीय स्थिरता और लोकतंत्र के मूल्यों की रक्षा के लिए सतर्कता ज़रूरी है।
शशि थरूर की टिप्पणी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या लोकतांत्रिक देशों में राजनीतिक बदलाव के बाद न्याय की प्रक्रिया निष्पक्ष रह पाती है, या फिर वह बदले की भावना से प्रभावित होती है। अब यह देखना होगा कि श्रीलंका की न्याय प्रणाली कैसे इस स्थिति को संभालती




