गणपति बप्पा के स्वागत में देशभर में उमंग, महाराष्ट्र में तैयारियां जोरों पर

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गणपति बप्पा के स्वागत में अब कुछ दिन ही बचे हैं खास तौर से महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी को लेकर तैयारियां जोरों पर है। भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश का जन्मोत्सव माना जाता है और इस बार यह उत्सव 27 अगस्त, बुधवार से शुरू होगा।

इस पर्व को महाराष्ट्र में बेहद भव्य तरीके से मनाया जाता है जिसमें खासकर मुंबई की रौनक देखते ही बनती है। जगह-जगह भव्य पंडाल सजते हैं और शोभायात्राओं से सड़कों पर श्रद्धा और उत्साह का सैलाब उमड़ पड़ता है।

मुंबई का सबसे प्रसिद्ध पंडाल ‘लालबागचा राजा’ पूरे देशभर में चर्चा का केंद्र रहता है। यहां दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। इस पंडाल में गृह मंत्री, मुख्यमंत्री, बड़े-बड़े राजनेता और उद्योगपति, बॉलीवुड के कलाकार भी गणपति बप्पा के दर्शन करने पहुंचते हैं।

गणेशोत्सव के दिनों में मुंबई में शाम को भोग आरती के बाद भक्ति और संस्कृति का संगम देखने को मिलता है। पंडालों में भजन, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ गरबा और डांडिया की भी धूम रहती है। हर उम्र के लोग इस त्यौहार को केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक उत्सव की तरह भी मनाते हैं।

अब यह पर्व केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहा। आज यह पूरे भारत का उत्सव बन चुका है। दिल्ली, बैंगलोर, जम्मू, इंदौर, लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद,जयपुर और दक्षिण से लेकर उत्तर भारत के कई हिस्सों में भी गणेश चतुर्थी धूमधाम से मनाई जाती है। लोग समाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं और गणपति बप्पा का स्वागत करते हैं।

गणेश चतुर्थी का यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है। अनंत चतुर्दशी के दिन “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारों के बीच प्रतिमाओं का विसर्जन कर बप्पा को विदाई दी जाती है।

मान्यता है किसी भी शुभ कार्य को सबसे पहले विघ्नहर्ता के आवाहन से शुरू कर मंगल कार्य की सफलता के लिए प्रार्थना की जाती है l गणेश जी की पूजा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

रिपोर्ट: निखिल रस्तोगी

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