प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में बिहार बंद, NDA के सभी साथी दल साथ

SHARE:

पटना, 4 सितंबर 2025:
बिहार की सियासत एक बार फिर गर्माई हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ हाल ही में विपक्ष द्वारा दिए गए विवादास्पद बयानों के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आज बिहार बंद का आह्वान किया है। खास बात यह है कि इस बंद को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सभी घटक दलों का समर्थन प्राप्त है।

भाजपा ने यह बंद “प्रधानमंत्री की गरिमा और देश की संस्थाओं के अपमान” के खिलाफ जताई जा रही नाराजगी के तहत बुलाया है। पार्टी का कहना है कि यह सिर्फ एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि “जनमानस की भावना” है।

क्या है मामला?

पिछले सप्ताह संसद में विपक्ष के कुछ नेताओं द्वारा पीएम मोदी को लेकर की गई टिप्पणियों से राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण हो गया था। भाजपा ने इन टिप्पणियों को न केवल अपमानजनक बताया, बल्कि इसे देश के प्रधानमंत्री के पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताया।

 NDA के सहयोगी दलों की एकजुटता

इस बार बिहार बंद को लेकर खास बात यह रही कि एनडीए के सभी सहयोगी दल – जेडीयू (JDU), हम (Hindustani Awam Morcha), वीआईपी (VIP) और अन्य छोटे दल – भाजपा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आ रहे हैं। इन दलों ने भी अपने कार्यकर्ताओं से बंद को सफल बनाने की अपील की है।

जदयू नेता नीतीश कुमार ने कहा, “प्रधानमंत्री देश के सम्मान का प्रतीक हैं। कोई भी टिप्पणी जो उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाती है, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

 क्या खुले और क्या बंद?

बंद के दौरान कई जिलों में बाजार, शैक्षणिक संस्थान और परिवहन सेवा आंशिक रूप से प्रभावित रही। हालांकि आपातकालीन सेवाएं जैसे एम्बुलेंस, अस्पताल और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति जारी रही। पुलिस प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है।

विपक्ष का क्या कहना है?

विपक्षी महागठबंधन ने इस बंद को “राजनीतिक नाटक” बताया है और कहा कि भाजपा जनमुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रही है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा, “बिहार की जनता बेरोजगारी और महंगाई से परेशान है, लेकिन भाजपा असली मुद्दों से ध्यान भटकाने में जुटी है।”

बिहार बंद के ज़रिए भाजपा और एनडीए ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि प्रधानमंत्री के अपमान को वे व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मुद्दा मानते हैं। अब देखना यह है कि यह आंदोलन राजनीतिक समीकरणों पर कितना असर डालता है, खासकर आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए।

Leave a Comment