कोलकाता, 15 सितंबर 2025 – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भारतीय सेना के पूर्वी कमान मुख्यालय, विजय दुर्ग (पूर्व में फोर्ट विलियम) में आयोजित 16वें सशस्त्र बल सम्मेलन (Combined Commanders’ Conference) का औपचारिक उद्घाटन किया। यह सम्मेलन 15 से 17 सितंबर तक चलेगा और इसे देश की रक्षा व्यवस्था में उच्चस्तरीय रणनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है।
सम्मेलन का विषय और उद्देश्य
इस बार सम्मेलन का मुख्य विषय “Year of Reforms — Transforming for the Future” निर्धारित किया गया है। इसके अंतर्गत सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण, तीनों सेनाओं के बीच तालमेल, संरचनात्मक सुधार और भविष्य की चुनौतियों के लिए परिचालन तत्परता पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मंच पर लिए गए फैसले आने वाले वर्षों में भारतीय सेनाओं की दिशा और रणनीति को नई गति देंगे।
प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, तीनों सेनाओं के प्रमुख और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। इस दौरान प्रधानमंत्री ने सेना और नागरिक नेतृत्व को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत को अपनी सैन्य क्षमताओं को और अधिक सशक्त तथा आत्मनिर्भर बनाना होगा।
मुख्य एजेंडे
सम्मेलन में जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा हो रही है, उनमें शामिल हैं:
रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण और तकनीकी आधुनिकीकरण को बढ़ावा
तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त परिचालन क्षमता और समन्वय को मजबूत करना
भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण और संगठनात्मक ढांचे में सुधार
सीमावर्ती और पड़ोसी क्षेत्रों की सुरक्षा रणनीतियों पर एकीकृत दृष्टिकोण
सुरक्षा और प्रधानमंत्री का कार्यक्रम
प्रधानमंत्री मोदी के कोलकाता दौरे को देखते हुए शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कई मार्गों पर यातायात नियंत्रण लागू किया गया है और विशेष सुरक्षा दस्ते तैनात किए गए हैं। इस यात्रा के बाद प्रधानमंत्री बिहार के पूर्णिया जाने वाले हैं, जहां वे एक नए हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे।
निष्कर्ष
16वां सशस्त्र बल सम्मेलन भारतीय सेना के लिए केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं बल्कि रणनीतिक दिशा तय करने का अवसर है। इसमें लिए गए निर्णय आने वाले समय में देश की सैन्य संरचना, आधुनिकरण योजनाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीतियों को गहराई से प्रभावित करेंगे।




