सूडान में मस्जिद पर ड्रोन हमला: 70 से ज्यादा की मौत, RSF पर आरोप

SHARE:

सूडान में जारी गृहयुद्ध के बीच एक बार फिर नागरिकों पर बड़ा हमला हुआ है। नॉर्थ दारफुर प्रांत की राजधानी एल फाशर में शुक्रवार सुबह नमाज़ के वक्त एक मस्जिद को ड्रोन से निशाना बनाया गया। हमले में कम से कम 70 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई गंभीर रूप से घायल हैं। राहत और बचाव दलों के मुताबिक मलबे में अब भी शव दबे हो सकते हैं, जिससे मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

हमला कैसे हुआ

स्थानीय सूत्रों और सेना के बयान के अनुसार, मस्जिद में लोग जुमे की नमाज़ के लिए इकट्ठा हो रहे थे तभी अचानक ड्रोन से हमला किया गया। धमाके की आवाज़ पूरे इलाके में गूँज उठी और मस्जिद पूरी तरह ध्वस्त हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि धमाके के बाद हर तरफ अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

जिम्मेदारी और आरोप

सूडानी सेना ने इस हमले के लिए रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) को जिम्मेदार ठहराया है। RSF और सूडानी सेना के बीच बीते दो वर्षों से संघर्ष जारी है, और इस दौरान कई बार नागरिक इलाकों को निशाना बनाए जाने की घटनाएँ सामने आई हैं। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की रिपोर्टों के अनुसार, RSF ने पहले भी ड्रोन और हवाई हमलों के ज़रिए नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया है।

मानवीय संकट और दारफुर की स्थिति

हमला उस क्षेत्र में हुआ जो पहले से ही विस्थापन और मानवीय संकट से जूझ रहा है। मस्जिद के पास स्थित अबू शौक विस्थापन शिविर में हजारों लोग पहले से शरण लिए हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने हाल के महीनों में दारफुर क्षेत्र में नागरिक हताहतों की संख्या बढ़ने पर गंभीर चिंता जताई है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, 2025 की पहली छमाही में ही नागरिक मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है और स्थिति लगातार बिगड़ रही है।

बचाव और राहत कार्य

हमले के बाद घायलों को पास के अस्पतालों में ले जाया गया, लेकिन एल फाशर का स्वास्थ्य ढांचा पहले से ही बुरी तरह प्रभावित है। कई अस्पताल या तो बंद हैं या सीमित संसाधनों के साथ काम कर रहे हैं। इसी वजह से घायलों को उचित उपचार मिल पाना मुश्किल हो रहा है। सेना और स्थानीय राहतकर्मी मलबे से शव और जीवित लोगों को निकालने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा हालात और हमलों के डर के कारण बचाव अभियान में दिक्कतें आ रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और असर

इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने नागरिकों पर हो रहे हमलों की निंदा की है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हमले मानवीय संकट को और गहराएंगे और बड़ी संख्या में लोगों को फिर से विस्थापित होने के लिए मजबूर करेंगे। दारफुर और सूडान के अन्य हिस्सों में पहले ही लाखों लोग भोजन, पानी और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं।

स्थिति अभी अस्थिर

मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर आंकड़े अलग-अलग आ रहे हैं और घटना की जांच जारी है। हालांकि यह साफ है कि यह हमला सूडान में चल रहे युद्ध की भयावहता को और गहरा कर गया है और आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।

Leave a Comment