ऑपरेशन सिंदूर का बचाव करते हुए निशिकांत दुबे ने Pakistan को UN में लताड़ा

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भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने 13 अक्टूबर 2025 को न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र में पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई। दुबे ने अपने भाषण की शुरुआत पाकिस्तान पर बच्चों और महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करने, सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप लगाकर की। उन्होंने पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र के ‘Children and Armed Conflict’ (CAAC) एजेंडे का सबसे बड़ा उल्लंघनकर्ता करार दिया और कहा कि पाकिस्तान को दूसरों को उपदेश देने से पहले अपने आंतरिक हालात पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने UN महासचिव की 2025 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि पाकिस्तान की सीमा पार हमलों, आर्टिलरी गोलाबारी और हवाई हमलों ने अफगान बच्चों की जान ली और उन्हें गंभीर रूप से घायल किया।

निशिकांत दुबे ने भारत की ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को आतंकवाद के खिलाफ एक वैध और संतुलित प्रतिक्रिया के रूप में पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की सेना ने मई 2025 में भारतीय सीमा गांवों पर गोलाबारी की, जिससे कई निर्दोष लोग मारे गए, और ऐसे में पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बोलना अत्यंत पाखंडी है। दुबे ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-आधारित कश्मीर में कई आतंकवादी शिविरों पर सर्जिकल स्ट्राइक की, जिसमें कई आतंकवादी नष्ट हुए।

अपने भाषण में उन्होंने पाकिस्तान की बच्चों और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा में विफलता पर भी जोर दिया। दुबे ने कहा कि पाकिस्तान को पहले अपने देश में बच्चों और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए और फिर दूसरों को उपदेश देने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने भारत की पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘1098 चाइल्ड हेल्पलाइन’ और ‘उज्जवला योजना’ जैसी योजनाएं बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और उनकी भलाई के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपेक्षा जताई कि वह पाकिस्तान की नीतियों पर ध्यान दे और बच्चों तथा महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभाए।

निशिकांत दुबे का यह भाषण पाकिस्तान के लिए एक कड़ा संदेश था। इस भाषण के माध्यम से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की नीतियों की आलोचना की, भारत की प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया और यह संदेश दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ है और बच्चों तथा महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह समर्पित है। उनके इस कड़े रुख ने न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की आलोचना की बल्कि भारत की छवि को एक जिम्मेदार और न्यायप्रिय राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत किया।

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