बिहार विधानसभा चुनाव के बीच गया जिले की बाराचट्टी सीट से एक बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। ‘माउंटेन मैन’ के नाम से मशहूर दशरथ मांझी के बेटे भागीरथ मांझी ने कांग्रेस पार्टी से टिकट न मिलने पर नाराजगी जाहिर की है। भागीरथ मांझी का कहना है कि राहुल गांधी ने उन्हें टिकट देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अंतिम सूची जारी होने पर उनका नाम गायब पाया गया। इस फैसले से न केवल मांझी परिवार निराश हुआ है बल्कि स्थानीय स्तर पर भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं में असंतोष देखा जा रहा है।
भागीरथ मांझी बाराचट्टी विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी में थे। उन्होंने दिल्ली जाकर कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की थी और पार्टी संगठन के साथ लगातार संपर्क में थे। परिवार के नजदीकी सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने पिछली बिहार यात्रा के दौरान मांझी परिवार से मुलाकात कर उनका सम्मान किया था और राजनीतिक रूप से सहयोग देने का वादा किया था। लेकिन जब महागठबंधन की सीट बंटवारे की सूची जारी हुई, तो यह सीट किसी अन्य उम्मीदवार को दे दी गई, जिससे मांझी परिवार आहत है।
दशरथ मांझी का नाम बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश में सम्मान से लिया जाता है। उन्होंने अकेले दम पर पहाड़ काटकर सड़क बनाई थी, जिससे उन्हें “माउंटेन मैन” का दर्जा मिला। उनका जीवन संघर्ष और समाजसेवा की मिसाल माना जाता है। इसी कारण उनके परिवार का राजनीति में एक सम्मानजनक स्थान रहा है। भागीरथ मांझी का कहना है कि वे जनता की सेवा के लिए राजनीति में आए हैं, लेकिन पार्टी ने उन्हें अवसर नहीं दिया।
सूत्रों का कहना है कि भागीरथ मांझी अब निर्दलीय चुनाव लड़ने पर विचार कर रहे हैं। अगर वे ऐसा करते हैं, तो यह महागठबंधन के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है। बाराचट्टी सीट पर मांझी परिवार का प्रभाव काफी गहरा माना जाता है और यहां दलित समाज के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसलिए अगर भागीरथ स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरते हैं, तो कांग्रेस के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व का यह निर्णय स्थानीय समीकरणों और महागठबंधन की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। पार्टी ने सीट बंटवारे में कई स्थानों पर क्षेत्रीय दलों को प्राथमिकता दी है। हालांकि, इस प्रक्रिया में कई पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया गया है, जिससे आंतरिक असंतोष उभर रहा है।
कांग्रेस की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, मांझी परिवार का कहना है कि वे जल्द ही जनता के बीच जाकर अपना पक्ष रखेंगे। दशरथ मांझी के पुत्र भागीरथ का यह बयान बिहार की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, क्योंकि मांझी परिवार का नाम आज भी सामाजिक न्याय और जनसंघर्ष का प्रतीक माना जाता है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राष्ट्रीय दल स्थानीय नायकों और सामाजिक प्रतीकों को पर्याप्त सम्मान और अवसर दे पा रहे हैं? फिलहाल, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भागीरथ मांझी आगे क्या कदम उठाते हैं — पार्टी के भीतर समझौते की राह चुनेंगे या जनता के बीच नया राजनीतिक रास्ता तलाशेंगे।




