न्यूयॉर्क मेयर चुनाव 2025: ज़ोहरान ममदानी की ऐतिहासिक जीत, नेहरू का जिक्र और ट्रंप को चुनौती

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न्यूयॉर्क सिटी के मेयर पद के चुनाव में ज़ोहरान ममदानी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली है। 34 वर्षीय ममदानी अब तक के सबसे युवा, पहले मुस्लिम और दक्षिण एशियाई मूल के मेयर बन गए हैं। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी रिपब्लिकन उम्मीदवार कर्टिस स्लिवा और अन्य दावेदारों को मात देकर यह बड़ी सफलता हासिल की। ममदानी, जो इससे पहले न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के सदस्य रह चुके हैं, प्रगतिशील नीतियों के समर्थक माने जाते हैं। उनकी जीत को शहर के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन और आव्रजन समर्थक राजनीति की दिशा में एक बड़ा कदम बताया जा रहा है।

जीत के बाद अपने भावनात्मक भाषण में ममदानी ने भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का उल्लेख करते हुए कहा कि “यह क्षण पुराने से नए की ओर कदम बढ़ाने का प्रतीक है।” यह वाक्य नेहरू के प्रसिद्ध “Tryst with Destiny” भाषण की याद दिलाता है। ममदानी ने इस उद्धरण के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की कि न्यूयॉर्क अब एक नए युग में प्रवेश कर चुका है — ऐसा युग जिसमें विविधता, समानता और प्रवासी समुदायों की भागीदारी को सबसे ऊपर रखा जाएगा।

अपने भाषण में ममदानी ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी सीधी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क एक “इमिग्रैंट-नेतृत्व वाला शहर” है और यह किसी भी प्रकार की विभाजनकारी राजनीति के आगे नहीं झुकेगा। ममदानी ने ट्रंप की आव्रजन विरोधी नीतियों पर तंज कसते हुए कहा कि “अगर किसी को हममें से एक तक पहुँचना है, तो उसे हम सभी से होकर गुजरना होगा।” उनके इस बयान को ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

ममदानी ने अपनी सरकार की प्राथमिकताओं में सस्ती आवास नीति, सार्वजनिक परिवहन सुधार, बेघरता खत्म करने और अमीर वर्ग पर कर बढ़ाने जैसी योजनाओं का वादा किया है। उनका कहना है कि शहर को ऐसा बनाना होगा जहां हर व्यक्ति को समान अवसर मिले और किसी को भी उसकी पहचान या मूल के कारण अलग महसूस न कराया जाए।

ममदानी की जीत ने न सिर्फ अमेरिका में बल्कि भारत सहित कई देशों में चर्चा बटोरी है। सोशल मीडिया पर लोग उनके भाषण की तुलना नेहरू के “भाग्य के साथ मुलाकात” वाले ऐतिहासिक क्षण से कर रहे हैं। कई लोगों ने उनकी सफलता को अमेरिकी राजनीति में बहुसांस्कृतिकता की नई मिसाल बताया है। वहीं, कुछ आलोचकों ने उनकी नीतियों को ‘अत्यधिक उदारवादी’ बताया, लेकिन समर्थक इसे ‘जनता के प्रतिनिधित्व की सच्ची जीत’ मान रहे हैं।

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