टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी साइबर ठगी के शिकार, खाते से उड़ाए गए 55 लाख रुपये

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पश्चिम बंगाल के श्रीरामपुर से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद कल्याण बनर्जी एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सांसद के एक पुराने बैंक खाते से करीब 55 लाख रुपये की भारी रकम जालसाजों ने फर्जीवाड़ा कर निकाल ली। पुलिस सूत्रों ने बताया कि ठगों ने पहले सांसद के खाते से जुड़ा केवाईसी (KYC) अपडेट कराते हुए उसमें दर्ज मोबाइल नंबर बदलवा लिया। इसके बाद उन्होंने खाते पर पूरा नियंत्रण हासिल कर लिया और कई चरणों में राशि को अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया। घटना का खुलासा तब हुआ जब बैंक ने खाते में संदिग्ध गतिविधियां देखते हुए सांसद को इसकी जानकारी दी।

जांच में सामने आया है कि साइबर अपराधियों ने सांसद के व्यक्तिगत दस्तावेजों की नकली प्रतियां बनाकर बैंक को गुमराह किया, जिससे वे केवाईसी अपडेट कराने में सफल रहे। आरोप है कि इसके बाद जालसाजों ने मोबाइल नंबर बदलने की प्रक्रिया भी पूरी की, जिसके चलते सांसद के फोन पर किसी भी ट्रांजैक्शन का अलर्ट नहीं पहुंचा। बैंक अधिकारियों के अनुसार, ठगी की राशि लगभग 55 से 56 लाख रुपये के बीच है, जिसमें से कुछ रकम ज्वेलरी खरीदने और एटीएम निकासी के जरिए खर्च की गई।

घटना की जानकारी मिलते ही कोलकाता पुलिस के साइबर क्राइम सेल ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बैंक ने भी आंतरिक स्तर पर जांच बिठाई है और संबंधित शाखा के कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है कि किस स्तर पर सुरक्षा खामी हुई। पुलिस ने ठगी की रकम के ट्रांजैक्शन ट्रेल को ट्रेस करना शुरू कर दिया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि धन कहां ट्रांसफर किया गया और किस खाते में जमा हुआ।

टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यह बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर बड़ा सवाल है और आम लोगों को ऐसी घटनाओं से सावधान रहना चाहिए। पार्टी के नेताओं ने भी साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। बैंक प्रबंधन ने सांसद को आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने तक खाते को सुरक्षित रखा जाएगा और दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस घटना को एक ‘सिस्टमेटिक केवाईसी फ्रॉड’ बताया है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों से बचाव के लिए ग्राहकों को अपने निष्क्रिय या पुराने खातों की समय-समय पर जांच करते रहना चाहिए। किसी भी संदिग्ध कॉल, ईमेल या लिंक पर अपनी निजी जानकारी साझा करने से बचना चाहिए। साथ ही दो-स्तरीय सुरक्षा प्रमाणीकरण, नियमित पासवर्ड परिवर्तन और एसएमएस अलर्ट सक्रिय रखना जरूरी है ताकि ऐसी धोखाधड़ी से बचा जा सके।

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