सासाराम में अमित शाह की हुंकार: ‘जंगलराज’ लौटाने की साजिश कर रहा विपक्ष

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बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र सासाराम में आयोजित एक विशाल जनसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव का नाम लेते हुए कहा कि इन नेताओं के दौर में देश की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर थी और आतंकवाद को पनपने का मौका मिला। शाह ने कहा कि उस समय देश पर बार-बार आतंकी हमले होते थे, जबकि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है और सीमाओं की सुरक्षा को अभेद्य बनाया है।

शाह ने विपक्षी गठबंधन पर यह आरोप लगाया कि वे घुसपैठियों के प्रति नरमी बरत रहे हैं और बिहार जैसे सीमावर्ती राज्य में अस्थिरता का माहौल बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अगर जनता ने गलत नेतृत्व चुना तो “जंगलराज” जैसी स्थिति वापस आ सकती है, जो राज्य के विकास के लिए बेहद घातक होगी। अपने भाषण में उन्होंने एनडीए सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि केंद्र ने बिहार में सड़क, बिजली, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि मोदी सरकार के नेतृत्व में देश की सीमाएं पहले से ज्यादा सुरक्षित हुई हैं और घुसपैठ के मामलों में बड़ी कमी आई है। उन्होंने विपक्ष पर “वोट बैंक की राजनीति” करने का आरोप लगाते हुए कहा कि एनडीए का लक्ष्य बिहार को स्थिर और आत्मनिर्भर बनाना है। शाह ने जनता से अपील की कि वे विकास और सुरक्षा की राह पर आगे बढ़ने के लिए एनडीए को दोबारा अवसर दें।

अमित शाह की यह रैली बिहार चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में आयोजित हुई, जब सभी प्रमुख दल अपने-अपने पत्ते खोल रहे हैं। शाह के बयान को राजनीतिक विश्लेषक भाजपा की रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं, जिसमें सुरक्षा, राष्ट्रवाद और विकास को प्रमुख चुनावी मुद्दे के रूप में उभारा जा रहा है। विपक्षी दलों ने हालांकि शाह के इन आरोपों को “जनता को भ्रमित करने का प्रयास” बताया है।

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