प्रदूषण से बढ़ते मरीजों के लिए केंद्र का बड़ा फैसला, डॉक्टरों को दो घंटे अनिवार्य ड्यूटी का आदेश

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केंद्र सरकार ने वायु प्रदूषण के बढ़ते स्वास्थ्य प्रभावों को देखते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में चेस्ट क्लीनिक (Chest Clinic) स्थापित करें। सरकार ने कहा है कि इन क्लिनिकों में डॉक्टरों की प्रतिदिन कम से कम दो घंटे की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाए ताकि सांस संबंधी और फेफड़ों की बीमारियों से पीड़ित लोगों को त्वरित जांच और उपचार मिल सके। यह कदम राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम (NPCCCHH) के तहत उठाया गया है, जिसका उद्देश्य प्रदूषण से बढ़ रही स्वास्थ्य समस्याओं पर नियंत्रण पाना है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को यह भी निर्देश दिया है कि चेस्ट क्लीनिकों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और पहले से श्वसन या हृदय रोग से पीड़ित लोगों पर विशेष ध्यान दिया जाए, क्योंकि यह समूह प्रदूषण के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील है। इन क्लीनिकों में मरीजों की स्क्रीनिंग, प्राथमिक इलाज, फेफड़ों की जांच और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही नागरिकों को प्रदूषण से बचाव के उपायों की जानकारी भी दी जाएगी।

केंद्र ने राज्यों को यह भी निर्देश दिए हैं कि प्रदूषण के उच्च स्तर वाले क्षेत्रों में स्थानीय स्वास्थ्य विभाग नियमित निगरानी और जनजागरूकता अभियान चलाए। इसमें लोगों को यह बताया जाएगा कि वायु गुणवत्ता खराब होने पर कैसे अपने स्वास्थ्य की सुरक्षा करें। इसके अलावा, केंद्र ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत निर्माण कार्यों पर नियंत्रण, सड़कों की यांत्रिक सफाई और पानी के छिड़काव जैसे उपायों को सख्ती से लागू करने के भी निर्देश दिए हैं ताकि प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सके।

सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल प्रदूषण के आंकड़े सुधारना नहीं, बल्कि शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में प्रदूषण जनित बीमारियों के निदान और प्रबंधन को मजबूत करना है। साथ ही सभी राज्य स्वास्थ्य विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रदूषण के चरम समय में चेस्ट क्लीनिकों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करें और डेटा रिपोर्टिंग की व्यवस्था को मजबूत करें ताकि नीति निर्माण के लिए सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकें।

विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों और शुष्क मौसम में वायु प्रदूषण के कारण सांस की दिक्कत, खांसी, अस्थमा और हृदय रोगों में वृद्धि देखने को मिलती है। इसलिए इन क्लीनिकों का संचालन प्रदूषण के चरम महीनों में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे ऐसे समय में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें, विशेषकर बच्चे और बुजुर्ग सावधानी बरतें, मास्क का उपयोग करें, और किसी भी श्वसन संबंधी परेशानी की स्थिति में तुरंत नजदीकी चेस्ट क्लीनिक या सरकारी अस्पताल से संपर्क करें।

यह कदम केंद्र सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वायु प्रदूषण को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातस्थिति की तरह देखा जा रहा है और इससे निपटने के लिए चिकित्सा संरचना, जनजागरूकता और नीति-स्तरीय समन्वय को प्राथमिकता दी जा रही है।

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