पंजाब के पटियाला जिले में स्थित शंभू बॉर्डर पर एक बार फिर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। सुबह से ही किसान संगठनों ने दिल्ली की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद कर दिया, जिससे राजपुरा-अंबाला मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा। पुलिस और प्रशासन पहले से सतर्क थे, इसलिए ट्रैफिक को संभालने के लिए वैकल्पिक रास्तों पर डायवर्जन लागू किए गए और यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा से बचने की सलाह दी गई। किसानों का यह विरोध मार्च राष्ट्रीय इंसाफ मोर्चा और कई किसान संगठनों द्वारा बुलाया गया था, जिसमें भारी संख्या में प्रदर्शनकारी शंभू बैरियर तक पहुंचे और फिर दिल्ली की ओर कूच करने की घोषणा की। किसानों ने कहा कि वे अपनी मांगों का ज्ञापन जंतर-मंतर पर प्रधानमंत्री को सौंपेंगे, ताकि केंद्र सरकार उनकी समस्याओं पर सीधा संज्ञान ले सके।
किसानों की मुख्य मांगों में फसलों के लिए लाभदायक मूल्य की गारंटी, कर्ज़ राहत, कृषि नीतियों में सुधार और उन सिख बंदियों की रिहाई शामिल है, जिनके बारे में दावा किया जाता है कि उन्होंने अपनी सज़ा पूरी कर ली है। हाल के महीनों में शंभू बॉर्डर पर किसानों के धरनों और टेंटों को हटाने की पुलिस कार्रवाई ने भी किसानों की नाराज़गी को बढ़ाया, जिसके चलते यह आंदोलन एक बार फिर उभर कर सामने आया है। कई किसानों ने इसे सरकार की संवेदनहीनता बताया और कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, विरोध कम नहीं होगा। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की है और कई चेकपॉइंट्स पर सुरक्षा बढ़ाई गई है।
ट्रैफिक व्यवस्था को संभालने के लिए पुलिस ने राजपुरा-फतेहगढ़ साहिब, लांडरां-मोहाली, बनूड़-जीरकपुर और डेराबस्सी जैसे मार्गों को वैकल्पिक रूप से खोला है, ताकि लोग दिल्ली और हरियाणा की ओर बिना अधिक बाधा के यात्रा कर सकें। हालांकि हाईवे बंद होने और बड़ी संख्या में किसानों के जुटने के कारण आसपास के इलाकों में जाम की स्थिति बनी रही। इसके बावजूद किसान संगठनों ने आंदोलन को शांतिपूर्ण बताया और कहा कि वे केवल अपनी आवाज़ सरकार तक पहुँचाना चाहते हैं। किसानों का यह भी कहना है कि अगर सरकार उनकी बात नहीं सुनेगी, तो वे आगे और बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है और अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि बातचीत से समाधान खोजा जा सकता है।
समग्र रूप से देखा जाए तो शंभू बॉर्डर का यह बंद पंजाब और हरियाणा के बीच आने-जाने वाले हजारों लोगों को प्रभावित कर रहा है और राष्ट्रीय राजधानी की ओर जाने वाले मार्गों पर भी दिक्कतें पैदा कर रहा है। किसानों का कहना है कि उनकी मांगें किसी एक संगठन की नहीं बल्कि पूरे देश के कृषि समुदाय की समस्याओं से जुड़ी हैं। वहीं प्रशासन और सरकार की कोशिश है कि हालात नियंत्रित रहें और बातचीत का माध्यम खुला रहे। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि किसानों का यह कूच दिल्ली तक पहुँचता है या प्रशासन किसी मध्य मार्ग तक पहुंच जाता है। फिलहाल सड़कें बंद होने और आंदोलन के तेज होने से क्षेत्र में स्थिति गंभीर बनी हुई है और लोगों को प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार यात्रा करने की सलाह दी जा रही है।




