कंबोडिया और थाईलैंड के बीच 2025 में भड़के सीमा विवाद ने अचानक गंभीर रूप ले लिया था। कई दिनों तक हुई झड़पों में दोनों तरफ सैनिकों की तैनाती बढ़ गई और हिंसा का खतरा तेज़ी से फैलने लगा। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए दोनों देशों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश की। बताया गया कि ट्रंप ने थाईलैंड और कंबोडिया के प्रधानमंत्रियों से लगातार फोन पर संपर्क रखा और उन्हें चेतावनी दी कि यदि संघर्ष जारी रहा तो अमेरिका आर्थिक दबाव जैसे कदम उठा सकता है। इस कूटनीतिक दबाव का असर यह हुआ कि दोनों देशों ने मलेशिया की मध्यस्थता में होने वाली वार्ता के लिए हामी भर दी।
मलेशिया की राजधानी में आयोजित शुरुआती वार्ता के बाद स्थिति कुछ हद तक शांत हुई और अंततः जुलाई 2025 में दोनों पक्ष एक तत्काल युद्धविराम पर सहमत हुए। इसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने शांति बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। वार्ता की इस नींव को आगे बढ़ाते हुए अक्टूबर 2025 में ASEAN शिखर सम्मेलन के दौरान एक व्यापक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते में ट्रंप, थाईलैंड और कंबोडिया के प्रधानमंत्री तथा मलेशियाई नेतृत्व शामिल था। इस ऐतिहासिक समझौते में विवादित इलाकों से भारी हथियार हटाने, बारूदी सुरंगों की सफाई, सीमा पर निगरानी के लिए ASEAN पर्यवेक्षकों की तैनाती और दोनों देशों के बीच गलत सूचना या भड़काऊ प्रचार रोकने का संकल्प शामिल था।
ट्रंप ने इस समझौते को बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस मध्यस्थता ने क्षेत्र में बड़े युद्ध को टाल दिया। उन्होंने इसे “असंभव को संभव बनाने” जैसा क्षण बताया और उम्मीद जताई कि शांति कायम रहने से हजारों लोगों की जान सुरक्षित रह सकती है। वहीं विशेषज्ञों ने यह टिप्पणी भी की कि सीमा विवाद ऐतिहासिक मानचित्रों की जटिल व्याख्याओं, मंदिरों पर दावों और पुराने विस्फोटकों से जुड़े जोखिमों की वजह से गहरे स्तर पर मौजूद है, इसलिए लंबे समय तक स्थायी समाधान के लिए निरंतर संवाद और निगरानी बेहद ज़रूरी होगी।
इस तरह, भले ही समझौते ने तनाव को थामने में तत्काल राहत दी हो, मगर यह भी साफ है कि दोनों देशों के बीच शांति पूरी तरह स्थिर नहीं है। सीमा क्षेत्रों में रह रहे लोगों की सुरक्षा, विस्थापन की समस्या और बारूदी सुरंगों का खतरा अभी भी मौजूद है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और दोनों देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति ही यह तय करेगी कि यह शांति कितनी टिकाऊ साबित होती है।




