नीतीश कुमार एक बार फिर बिहार की सत्ता संभालने जा रहे हैं और यह उनका दसवां कार्यकाल होगा। आगामी 20 नवंबर को पटना के गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किए जाने की तैयारी है, जिसमें केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ नेता भी शामिल हो सकते हैं। विधानसभा चुनावों में एनडीए की बड़ी जीत के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी है। जदयू और भाजपा के शीर्ष नेताओं की लगातार बैठकों के बाद पुराने फार्मूले के आधार पर मंत्रालयों का बंटवारा तय किया गया है। इस फार्मूले के मुताबिक भाजपा को लगभग 15–16 मंत्री पद मिलने की संभावना है जबकि जदयू के खाते में मुख्यमंत्री समेत लगभग 14 मंत्री पद रह सकते हैं। चुनाव परिणामों में भाजपा ने 80 से अधिक और जदयू ने लगभग इतनी ही सीटें जीतकर गठबंधन को मजबूत बहुमत की स्थिति में पहुंचाया है। एलजेपी (रामविलास), हम और अन्य छोटे सहयोगी दलों की भूमिका भी सरकार गठन में अहम रही है, जिनमें से कुछ को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है।
नई सरकार में लगभग 30 से 32 मंत्रियों की टीम शामिल हो सकती है, जिसमें वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ कुछ नए चेहरों को भी जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। भाजपा और जदयू दोनों ही दल अपने अनुभवी नेताओं को गृह, वित्त, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास जैसे प्रमुख विभाग देना चाहते हैं। मीडिया रिपोर्टों में लोजपा (रामविलास) को तीन मंत्री पद मिलने की भी चर्चा है, हालांकि सरकार की ओर से आधिकारिक सूची शपथ ग्रहण के बाद जारी की जाएगी। शीर्ष नेतृत्व के बीच मंत्रालयों के विभाजन, विभागों के प्रभार और सहयोगी दलों की भागीदारी को लेकर अंतिम दौर की बातचीत जारी है। सभी दलों की सहमति के बाद ही अंतिम कैबिनेट सूची राज्यपाल को भेजी जाएगी। फिलहाल नए मंत्रियों के नाम गोपनीय रखे गए हैं, लेकिन यह तय माना जा रहा है कि नीतीश कुमार अनुभव को प्राथमिकता देते हुए ऐसी टीम बनाएँगे जो गठबंधन की स्थिरता और शासन के सुचारू संचालन को मजबूत करे।
बिहार में लगातार बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच यह गठबंधन सरकार स्थिरता की उम्मीद के साथ आगे बढ़ रही है। चुनावी जनादेश ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जनता ने एनडीए पर भरोसा जताया है और इसी विश्वास के साथ गठबंधन अब शासन की नई रूपरेखा तैयार कर रहा है। शपथ ग्रहण समारोह से पहले सुरक्षा, मंच व्यवस्था और अतिथि प्रबंधन से जुड़ी तैयारियाँ लगभग पूरी कर ली गई हैं। राज्यपाल के समक्ष शपथ लेने के बाद नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें विभागों के प्रभार, विकास प्राथमिकताओं और अगले छह महीनों की कार्ययोजना पर चर्चा होने की संभावना है। कुल मिलाकर, बिहार में एक बार फिर नीतीश कुमार और उनका पुराना गठबंधन सत्ता में लौट रहा है, और सरकार की दिशा, टीम तथा प्राथमिकताओं को लेकर राज्य की जनता की निगाहें पूरी तरह टिकी हुई हैं।




