चुनाव आयोग ने असम के लिए मतदाता सूची का विशेष संशोधन (Special Revision) शुरू करने का फैसला किया है, जिसे आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के रूप में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आयोग ने निर्देश दिया है कि संशोधन प्रक्रिया के दौरान 1 जनवरी 2026 को योग्यता-तिथि (Qualifying Date) माना जाएगा। इसका अर्थ है कि इस तारीख तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नागरिकों को नये मतदाता के रूप में शामिल किया जा सकेगा। चुनाव आयोग ने यह आदेश असम के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) को भेज दिया है और राज्य स्तर पर सभी निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक तैयारियाँ शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
असम में यह संशोधन प्रक्रिया देश के अन्य हिस्सों में लागू होने वाली Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया से अलग होगी। असम को अलग प्रक्रिया दिए जाने के पीछे प्रमुख वजह राज्य की संवेदनशील परिस्थितियाँ, नागरिकता से जुड़े मुद्दे और पूर्व में हुए डाटा सत्यापन की अलग प्रकृति को बताया जा रहा है। इन कारणों से आयोग ने असम में स्वतंत्र प्रक्रिया लागू करने का निर्णय लिया है ताकि मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाया जा सके।
विशेष संशोधन के तहत चुनाव आयोग पहले ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी करेगा, जिसके बाद आमजन से दावे और आपत्तियाँ आमंत्रित की जाएंगी। नागरिक अपने नाम जोड़ने, हटाने या सुधार के लिए आवेदन कर सकेंगे, जबकि बूथ स्तर के अधिकारी (BLO), ERO और AERO घर-घर जाकर दस्तावेज़ों का सत्यापन करेंगे। इसमें नए मतदाताओं का पंजीकरण, मृत व्यक्तियों की प्रविष्टियाँ हटाना, गलत या दोहराव वाली प्रविष्टियों को सुधारना और पते में परिवर्तन जैसी प्रक्रियाएँ शामिल रहेंगी। आयोग ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी शामिल रखने पर जोर दिया है।
राज्य सरकार और प्रशासन ने चुनाव आयोग के इस निर्णय का स्वागत किया है और संशोधन अभियान में पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया है। अधिकारियों का मानना है कि यह अभियान आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अधिक सटीक और त्रुटिहीन मतदाता सूची तैयार करने में मदद करेगा। चूँकि असम में नागरिकता और मतदाता सत्यापन से जुड़े मामलों की संवेदनशीलता पहले से मौजूद है, इसलिए आयोग इस पूरी प्रक्रिया में अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए इसे समयसीमा में पूरा करने पर जोर दे रहा है।




