विदेश में साइबर ठगी सिंडिकेट्स के जाल में फँसाए गए कई भारतीय आईटी और डिजिटल स्किल्स वाले युवाओं को आज दिल्ली लाया जा रहा है। ये सभी वे पीड़ित हैं जिन्हें झूठे जॉब ऑफर्स के नाम पर म्यांमार, कंबोडिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य ठिकानों पर ले जाकर साइबर-फ्रॉड ऑपरेशनों में जबरन काम करने के लिए मजबूर किया गया था। भारतीय एजेंसियों और विदेश मंत्रालय की सक्रिय भूमिका के बाद हाल ही में इन युवाओं को बंधन से मुक्त करवाया गया। अधिकारियों के अनुसार, छुड़ाए गए समूह में दिल्ली-एनसीआर के कई युवक भी शामिल हैं, जिन्हें सबसे पहले मेडिकल परीक्षण, परामर्श और प्राथमिक पूछताछ के लिए दिल्ली स्थित केंद्रों में लाया जाएगा।
पिछले कुछ हफ्तों से भारत सरकार ने बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चलाते हुए दक्षिण-पूर्व एशिया के साइबर-स्कैम कंपाउंड्स में फँसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने का अभियान तेज किया है। इस दौरान कई विशेष उड़ानों और कूटनीतिक समन्वय के जरिये सैकड़ों युवाओं को वापस भारत लाया गया। लौटे हुए युवाओं ने खुलासा किया कि उन्हें विदेश भेजने से पहले आकर्षक नौकरी, शानदार वेतन और तकनीकी कार्यों का लालच दिया गया था, मगर पहुँचने के बाद उनके पासपोर्ट छीन लिए गए और उन्हें ऑनलाइन ठगी स्कीमों में जबरन काम करने के लिए मजबूर किया गया।
जाँच एजेंसियों ने इस मामले में घरेलू रैकेट का भी पर्दाफाश किया है, जिसके जरिए देश के विभिन्न राज्यों में मौजूद एजेंट युवाओं को फर्जी इंटरव्यू और मनगढ़ंत कंपनी ऑफरों का झांसा देकर विदेश भेजते थे। कई राज्यों की पुलिस तथा CBI ने ऐसे एजेंटों पर कार्रवाई शुरू कर दी है, जिनकी कड़ी विदेशी गिरोहों से जुड़ी हुई बताई जा रही है। प्रारंभिक पूछताछ के अनुसार, यह नेटवर्क केवल जॉब ट्रैफिकिंग तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से बड़े पैमाने पर साइबर ठगी ऑपरेशनों को मानव संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे थे।
दिल्ली पहुंचने वाले युवाओं की काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता पर विशेष जोर दिया जा रहा है, क्योंकि कई पीड़ित महीनों तक मानसिक तनाव, भय और बंधक जैसी परिस्थितियों में रहे हैं। संबंधित विभाग उन्हें कानूनी सुरक्षा, दस्तावेज पुनर्सत्यापन और आगे रोजगार मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराएगा। NCR के परिवार अपने बच्चों को दिल्ली पहुंचते ही मिल सकेंगे, जबकि अन्य राज्यों के युवाओं को उनके गृह राज्यों तक भेजने की तैयारी भी की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह अब भारतीय तकनीकी युवाओं को निशाना बना रहे हैं। इसलिए विदेश नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को किसी भी ऑफर की जांच, कंपनी सत्यापन, एजेंट की वैधता और अनुबंध के कानूनी पक्ष को गहराई से समझना बेहद जरूरी है। सरकार ने लोगों को सतर्क रहने और संदेह होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस से संपर्क करने की सलाह दी है।




