केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आगामी बजट 2026-27 की तैयारी को गति देते हुए नई दिल्ली में इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ महत्वपूर्ण प्री-बजट बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, पावर मंत्रालय, पोर्ट्स-शिपिंग-जलमार्ग मंत्रालय, रेलवे बोर्ड सहित कई प्रमुख मंत्रालयों के सचिव, वरिष्ठ अधिकारी और सरकार के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर भी शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य आगामी वित्तीय वर्ष के लिए अवसंरचना तथा ऊर्जा क्षेत्र की आवश्यकताओं, निवेश की संभावनाओं, चुनौतियों और नीति-उन्मुख समाधान पर विस्तृत सलाह-मशविरा करना रहा। वित्त मंत्री की अध्यक्षता में हुई यह परामर्श बैठक बजट तैयारियों के क्रम में आयोजित की जा रही श्रृंखला का एक अहम चरण मानी जा रही है।
बैठक के दौरान विशेषज्ञों ने सरकार के पूंजीगत व्यय को आर्थिक विकास की मजबूती के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए सुझाव दिए कि बड़े पैमाने पर अवसंरचना निर्माण के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण तंत्र को और मजबूत करना होगा। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की साझेदारी, विशेष वित्तीय विंडो, पुनर्वित्त सुविधा (री-फाइनेंसिंग), निवेश आकर्षित करने के लिए सक्षम माहौल और परियोजनाओं में तेजी से अनुमोदन जैसी जरूरतों पर बल दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क, रेल, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में निवेश वृद्धि, अगले दशक में भारत की आर्थिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी। साथ ही, ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार, ग्रीन एनर्जी मिशन, पावर ग्रिड को अधिक सुदृढ़ बनाने, स्टोरेज क्षमता और ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर और विश्वसनीय बनाने के लिए दीर्घकालिक नीतियों की आवश्यकता का उल्लेख किया।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि ऊर्जा संक्रमण (ग्रीन एनर्जी ट्रांज़िशन) को सफल बनाने के लिए भारी निवेश की जरूरत है। इसके साथ ही उद्योगों और नागरिकों के लिए स्थायी ऊर्जा उपलब्ध कराने हेतु आधुनिक ट्रांसमिशन नेटवर्क, स्मार्ट ग्रिड और मल्टी-नोडल लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। रेलवे और पोर्ट सेक्टर के प्रतिनिधियों ने यह सुझाव दिया कि अगले बजट में मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, फ्रेट कॉरिडोर, बंदरगाह-से-रेल लिंक और कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ाने हेतु अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इन सुझावों का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश की परिवहन और ऊर्जा प्रणालियाँ तेजी से विकासशील अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक और सक्षम बन सके।
वित्त मंत्रालय ने विशेषज्ञों से मिले इन सुझावों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है और संकेत दिया है कि उन्हें बजट 2026-27 की आंतरिक समीक्षा और नीति-ड्राफ्टिंग प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इससे पहले सरकार बैंकिंग, आईटी, पर्यटन, पूंजी बाजार और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ भी कई प्री-बजट परामर्श कर चुकी है। इन सभी सुझावों का सम्मिलित विश्लेषण कर बजट तैयार किया जाएगा, ताकि उद्योग, आम नागरिक और राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों का संतुलित प्रतिनिधित्व हो सके। आगामी बजट में अवसंरचना निवेश, ऊर्जा संक्रमण, लॉजिस्टिक्स दक्षता और आर्थिक वृद्धि को गति देने वाले उपायों से उम्मीदें बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों की मानें तो यह बजट भारत की विकास यात्रा को अगले चरण में ले जाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।




