RBI का ऐतिहासिक कदम: 5,673 सर्कुलर रद्द, 244 मास्टर गाइडलाइन से आसान होगा बैंकिंग नियमों का पालन

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भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में बैंकिंग नियमों और निर्देशों को सरल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया है। RBI ने 28 नवंबर 2025 को घोषणा की कि उसने पुराने और अप्रासंगिक 5,673 सर्कुलर रद्द कर दिए हैं, जिनमें से कुछ दशकों पुराने थे। इसके साथ ही, करीब 3,800 महत्वपूर्ण सर्कुलर को मिलाकर 244 नई “मास्टर डायरेक्शन्स” या गाइडलाइन जारी की गई हैं। कुल मिलाकर, 9,446 सर्कुलर और निर्देशों को या तो रद्द किया गया या कंसोलिडेट कर नया ढांचा तैयार किया गया, जो RBI के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी कंसोलिडेशन पहल मानी जा रही है।

नए मास्टर डायरेक्शन्स को फंक्शन वाइज और एंटिटी वाइज तैयार किया गया है, ताकि प्रत्येक प्रकार की वित्तीय संस्था जैसे कमर्शियल बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, एनबीएफसी आदि के लिए नियम स्पष्ट और लागू करना आसान हो। डिजिटल बैंकिंग से जुड़े विशेष निर्देशों के लिए सात नई मास्टर डायरेक्शन्स भी जारी की गई हैं, जो मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई और ऑनलाइन पेमेंट की सुरक्षा और सुविधा को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखती हैं। RBI का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाएं नियमों का पालन स्पष्ट और सुसंगत तरीके से करें, जिससे जटिलता और भ्रम कम हो।

इस बदलाव का आम ग्राहकों पर भी सकारात्मक असर होने की उम्मीद है। अब बैंक और वित्तीय संस्थाओं को पुराने और बिखरे हुए नियमों के आधार पर कार्य नहीं करना होगा, जिससे बैंकिंग सेवा में देरी या गलतफहमी की संभावना घटेगी। डिजिटल बैंकिंग सेवाओं में सुधार, पारदर्शिता में वृद्धि और शिकायत निवारण की प्रक्रिया में सहजता आएगी। इसके अलावा, बैंकिंग कंपनियों के लिए अनुपालन लागत कम होने से यह लाभ सीधे ग्राहकों तक पहुंच सकता है, चाहे वह लोन, निवेश या अन्य वित्तीय लेन-देन से जुड़ा हो।

RBI के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने कहा है कि यह पहल नियमों की स्पष्टता, सुसंगति और अनुपालन में आसानी लाने की दिशा में है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कदम केवल पुराने सर्कुलर रद्द करने और उन्हें कंसोलिडेट करने तक सीमित है, किसी मौजूदा कानून में बड़े बदलाव का मतलब नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से बैंकिंग नियम अधिक सरल और आधुनिक बनेंगे, और आने वाले समय में ग्राहक अनुभव में सुधार देखने को मिलेगा। कुल मिलाकर, RBI का यह कदम न केवल बैंकिंग संस्थाओं के लिए नियमों का पालन आसान बनाएगा, बल्कि आम लोगों के लिए बैंकिंग सेवाओं में सुधार और पारदर्शिता भी लाएगा।

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