उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में धान खरीद प्रक्रिया को और अधिक सुचारू, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने के लिए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि क्रय केंद्र पर आने वाले हर अन्नदाता किसान का धान अनिवार्य रूप से खरीदा जाए, चाहे वह किसी भी क्षेत्र से हो या कितनी भी मात्रा लेकर पहुँचा हो। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी किसान अपनी उपज बेचने के लिए भटकने या शोषण का शिकार होने को मजबूर न हो। इसी उद्देश्य से योगी सरकार ने इस खरीफ विपणन सत्र में धान खरीद की निगरानी को और मजबूत किया है तथा जिलों के प्रशासन, खाद्य विभाग और क्रय एजेंसियों को संयुक्त रूप से सख़्ती से पालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं।
बैठक में बताया गया कि राज्य में इस समय हजारों क्रय केंद्र संचालित हैं और सरकार ने इनकी संख्या बढ़ाकर लगभग 5,000 केंद्र तक ले जाने का निर्देश दिया है, ताकि किसानों को अपने गाँव या निकट के बाजार में ही खरीद सुविधा उपलब्ध हो सके। जिन जिलों में खरीद धीमी गति से हो रही है, वहां विशेष निगरानी रखने और किसानों को क्रय प्रक्रिया, पंजीकरण और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से संबंधित जानकारी व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने के लिए प्रचार-प्रसार तेज करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि सभी केंद्रों पर वजन मशीन, बोरों की व्यवस्था और मैनपावर पर्याप्त मात्रा में हो, ताकि किसी भी किसान को केंद्र पर लंबा इंतजार न करना पड़े।
धान खरीद के साथ-साथ सरकार ने भुगतान प्रक्रिया को भी पूरी तरह समयबद्ध बनाया है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि किसानों को धान बेचने के बाद 48 घंटे के भीतर भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचना चाहिए। इसके लिए ई-उपार्जन पोर्टल पर डेटा एंट्री, सत्यापन और अनुमोदन प्रणाली को और तेज़ करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने समीक्षा बैठक में बताया कि इस सत्र में पहले से अधिक किसानों ने अपना धान बेचा है और सरकार लगातार बड़े पैमाने पर भुगतान कर रही है। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि किसी भी जनपद में भुगतान में देरी या अनियमितता पाई गई तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
मुख्यमंत्री योगी ने इस समीक्षा में फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति और मिल-मैपिंग से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि मिड-डे मील और आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति किसी भी हाल में बाधित न हो। इसके लिए मिलरों की निगरानी और गुणवत्ता जांच को और सख्त करने को कहा गया है। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि धान उठान, परिवहन और भंडारण सब कुछ समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से हो, ताकि आगे किसी प्रकार की शिकायत न उठे।
अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और धान खरीद के दौरान किसी भी किसान का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। योगी सरकार का दावा है कि इस बार की धान खरीद प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुचारू और व्यवस्थित रहेगी, क्योंकि प्रशासनिक स्तर पर विशेष मॉनिटरिंग सेल, नियमित निरीक्षण और त्वरित शिकायत निवारण प्रणाली लागू की गई है। सरकार का मानना है कि इन कदमों से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का पूरा लाभ मिलेगा और राज्य में कृषि अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।




