दिल्ली की जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, टोल प्लाजा बंद करने पर विचार

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दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि मौजूदा हालात बेहद गंभीर हैं और अब केवल कागजी नीतियों से काम नहीं चलेगा। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर अब तक किए गए कई प्रयास ज़मीनी स्तर पर प्रभावी साबित नहीं हो पाए हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अधिकारियों से यह भी पूछा कि क्या प्रदूषण के चरम समय में यातायात के दबाव को कम करने के लिए नौ प्रमुख टोल प्लाज़ों को अस्थायी रूप से बंद नहीं किया जा सकता। अदालत का मानना है कि टोल प्लाज़ों पर लगने वाले जाम से वाहनों का उत्सर्जन बढ़ता है, जिससे प्रदूषण और गंभीर होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे नौ टोल प्लाज़ों पर टोल वसूली अस्थायी रूप से निलंबित करने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार करें और इस पर जल्द निर्णय लेकर अदालत को अवगत कराएं। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जनवरी तक के लिए टोल-मुक्त व्यवस्था लागू करने से प्रदूषण कम करने में मदद मिलती है, तो इस विकल्प को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी फैसले से पहले उसके प्रशासनिक और आर्थिक प्रभावों का आकलन करना ज़रूरी होगा।

प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए वाहनों को लेकर सख्ती और बढ़ा दी गई है। दिल्ली में अब बाहरी क्षेत्रों से आने वाले गैर-बीएस-6 मानक वाले वाणिज्यिक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लागू किया गया है। केवल बीएस-6, सीएनजी, एलएनजी या इलेक्ट्रिक वाहनों को ही राजधानी में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है। इसके साथ ही जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल और डीज़ल पंपों पर ईंधन नहीं दिया जाएगा। इसके लिए ईंधन स्टेशनों पर निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।

इसके अलावा पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर भी सख्त कार्रवाई की जा रही है। उम्र पूरी कर चुके और अधिक उत्सर्जन करने वाले वाहनों को लेकर पहले जो ढील दी जाती थी, उसे अब समाप्त किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि ऐसे वाहनों को किसी भी तरह की छूट नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि ये वायु प्रदूषण के बड़े कारणों में शामिल हैं।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्थायी कदमों के साथ-साथ दीर्घकालिक समाधान बेहद जरूरी हैं। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, मालवाहक वाहनों के लिए वैकल्पिक समय और मार्ग तय करना तथा प्रदूषण नियंत्रण नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना समय की मांग है। सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि भविष्य में वही आदेश दिए जाएंगे जो व्यवहारिक हों और जिनका असर धरातल पर साफ दिखाई दे, ताकि दिल्ली-एनसीआर के लोगों को स्वच्छ हवा मिल सके।

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