विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पारंपरिक, पूरक और समेकित चिकित्सा को वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पुस्तकालय शुरू किया है। इसे ट्रेडिशनल मेडिसिन ग्लोबल लाइब्रेरी (TMGL) नाम दिया गया है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े वैज्ञानिक शोध, नीतिगत दस्तावेज, नियामक दिशानिर्देश और विभिन्न देशों के अनुभवों को एक ही जगह पर उपलब्ध कराएगा। इस पुस्तकालय में 15 लाख से अधिक शोध और संदर्भ सामग्री को शामिल किया गया है, जिससे शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, चिकित्सकों और विद्यार्थियों को प्रमाण-आधारित जानकारी आसानी से मिल सकेगी।
TMGL का औपचारिक ऐलान WHO के ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन के दौरान किया गया, जिसकी मेज़बानी भारत कर रहा है। यह शिखर सम्मेलन पारंपरिक चिकित्सा के वैज्ञानिक उपयोग, नवाचार और आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में इसके समेकन पर केंद्रित है। WHO का मानना है कि यह डिजिटल पुस्तकालय पारंपरिक चिकित्सा को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने, शोध को बढ़ावा देने और वैश्विक स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य नीतियां बनाने में सहायक होगा।
इस पहल के पीछे भारत की अहम भूमिका रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पारंपरिक चिकित्सा के महत्व को बार-बार रेखांकित किया है और इसके ज्ञान को डिजिटल रूप में संरक्षित कर दुनिया के साथ साझा करने का प्रस्ताव रखा था। पीएम मोदी के इसी दृष्टिकोण के अनुरूप WHO ने इस वैश्विक डिजिटल पुस्तकालय को आकार दिया। भारत पहले ही WHO के ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन के माध्यम से आयुष, योग और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक पहचान दिलाने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
TMGL को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल्स भी शामिल हैं। इनकी मदद से पारंपरिक ग्रंथों, शोध पत्रों और डेटा को आसानी से खोजा और समझा जा सकेगा। इससे पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक भाषा में प्रस्तुत करने और उसे प्रमाणिक रूप से वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों से जोड़ने में मदद मिलेगी।
WHO का कहना है कि पारंपरिक चिकित्सा पर वैश्विक स्तर पर शोध और फंडिंग अभी भी सीमित है, ऐसे में यह डिजिटल पुस्तकालय ज्ञान की खाई को पाटने का काम करेगा। साथ ही, यह पहल जैव विविधता संरक्षण, बौद्धिक संपदा अधिकार और पारंपरिक ज्ञान के नैतिक उपयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को भी मजबूती देगी। भविष्य में TMGL के जरिए देशों के बीच शोध सहयोग बढ़ेगा और पारंपरिक चिकित्सा को सुरक्षित, प्रभावी और वैज्ञानिक तरीके से अपनाने का मार्ग प्रशस्त होगा।




