वित्तीय समावेशन में भारत की ऐतिहासिक छलांग, जन-धन योजना ने रचा नया कीर्तिमान

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प्रधानमंत्री जन-धन योजना (PMJDY) ने भारत को वित्तीय समावेशन और डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर किया है। 28 अगस्त 2014 को शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य देश के हर नागरिक को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना था, ताकि कोई भी व्यक्ति आर्थिक रूप से मुख्यधारा से बाहर न रहे। बीते एक दशक में यह योजना गरीब, ग्रामीण और पिछड़े वर्ग के करोड़ों लोगों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनी है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत देशभर में 53 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं। इनमें से लगभग 66 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि योजना की पहुंच देश के दूर-दराज के इलाकों तक बनी है। खास बात यह है कि कुल खातों में से करीब 55 प्रतिशत खाते महिलाओं के नाम पर हैं, जिससे महिला सशक्तिकरण को भी बड़ा बल मिला है।

जन-धन खातों में जमा राशि भी लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में इन खातों में कुल जमा राशि 2.30 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अब गरीब और मध्यम वर्ग के लोग भी बैंकिंग प्रणाली पर भरोसा करने लगे हैं और नियमित बचत को अपनाने लगे हैं। इसके साथ ही 36 करोड़ से अधिक खाताधारकों को RuPay डेबिट कार्ड भी जारी किए गए हैं, जिनके साथ 2 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा कवर मिलता है।

प्रधानमंत्री जन-धन योजना ने भारत में डिजिटल भुगतान क्रांति को भी मजबूती दी है। UPI, RuPay कार्ड, मोबाइल बैंकिंग और PoS मशीनों के बढ़ते उपयोग से देश तेजी से कैशलेस इकोनॉमी की ओर बढ़ रहा है। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल भुगतान बाजारों में शामिल हो चुका है। UPI लेन-देन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है और करोड़ों लोग रोजाना डिजिटल माध्यम से भुगतान कर रहे हैं।

इस योजना के माध्यम से सरकार की Direct Benefit Transfer (DBT) व्यवस्था को भी मजबूती मिली है। अब सब्सिडी, पेंशन, छात्रवृत्ति, किसान सम्मान निधि और अन्य सरकारी योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है, जिससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है और पारदर्शिता बढ़ी है।

प्रधानमंत्री जन-धन योजना ने न केवल बैंक खाते खोलने तक सीमित भूमिका निभाई है, बल्कि लोगों को वित्तीय रूप से जागरूक करने, डिजिटल सेवाओं से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने में भी अहम योगदान दिया है। सरकार अब खातों को और अधिक सक्रिय बनाने, क्रेडिट सुविधा से जोड़ने और वित्तीय साक्षरता बढ़ाने पर भी जोर दे रही है।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री जन-धन योजना ने भारत की आर्थिक संरचना को मजबूत किया है और करोड़ों नागरिकों को सम्मानजनक वित्तीय पहचान दी है। यह योजना आज दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहल बन चुकी है और भारत को डिजिटल अर्थव्यवस्था के नए युग में अग्रणी बना रही है।

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