आसमान की ताकत बढ़ाएगा भारत: राफेल खरीद के बाद सुखोई-57 पर भी नजर

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भारत की वायु शक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए फ्रांस से 114 अतिरिक्त राफेल फाइटर जेट की खरीद को मंजूरी दे दी है। इसे देश के रक्षा इतिहास की सबसे बड़ी विमान खरीद डीलों में से एक माना जा रहा है। इस फैसले के साथ ही भारतीय वायु सेना की मारक क्षमता, आधुनिक युद्धक क्षमता और रणनीतिक ताकत में बड़ा इजाफा होगा। राफेल जैसे मल्टी-रोल फाइटर जेट हवा में वर्चस्व कायम करने, दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमले करने और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसे अभियानों में बेहद प्रभावी माने जाते हैं।

हालांकि राफेल डील को मंजूरी मिलने के बावजूद भारत ने अपने विकल्प पूरी तरह बंद नहीं किए हैं। रक्षा मंत्रालय और वायु सेना रूस के अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट सुखोई-57 (Su-57) पर भी गंभीरता से विचार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारत एक ऐसे फाइटर जेट की तलाश में है जो स्टेल्थ तकनीक, सुपरक्रूज क्षमता, एडवांस एवियोनिक्स और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस हो।

रूस की ओर से भारत को Su-57E के लिए सह-उत्पादन, तकनीकी साझेदारी और ‘मेक-इन-इंडिया’ के तहत निर्माण जैसे प्रस्ताव दिए गए हैं। इन प्रस्तावों के तहत भारतीय कंपनियों, खासकर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), को निर्माण प्रक्रिया में अहम भूमिका मिल सकती है। HAL पहले ही Su-30MKI जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों का निर्माण कर चुका है, जिससे उसके पास बड़े स्तर पर फाइटर जेट उत्पादन का अनुभव मौजूद है। ऐसे में Su-57 के निर्माण को लेकर भारत के पास मजबूत आधार माना जा रहा है।

भारतीय वायु सेना के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्क्वाड्रन की घटती संख्या है। वर्तमान में वायु सेना के पास जरूरत के मुकाबले कम लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जबकि चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देश अपनी वायु शक्ति को लगातार मजबूत कर रहे हैं। चीन पहले ही पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर J-20 को अपने बेड़े में शामिल कर चुका है, जबकि पाकिस्तान को भी भविष्य में आधुनिक लड़ाकू विमानों की आपूर्ति मिलने की संभावना है।

भारत का स्वदेशी AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) प्रोजेक्ट अभी विकास के चरण में है और इसके परिचालन स्तर पर पहुंचने में अभी कई साल लग सकते हैं। ऐसे में Su-57 को एक अंतरिम समाधान के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे भारत को पांचवीं पीढ़ी की तकनीक का अनुभव मिल सके।

इस तरह 114 राफेल विमानों की खरीद के साथ-साथ सुखोई-57 पर विचार यह साफ संकेत देता है कि भारत अपनी वायु शक्ति को लेकर किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करना चाहता। सरकार की रणनीति साफ है—आधुनिक तकनीक, आत्मनिर्भरता और मजबूत रक्षा क्षमता के साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार

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