मुस्लिम बहुल इलाकों में लीग और हिंदू इलाकों में BJP की जीत पर मंत्री का बयान, केरल में सियासी घमासान

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तिरुवनंतपुरम, 19 जनवरी 2026 — केरल सरकार के मंत्री साजी चेरियन द्वारा मुस्लिम लीग और भाजपा को लेकर दिए गए बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। हाल ही में कासरगोड नगरपालिका और मलप्पुरम में हुए स्थानीय निकाय चुनावों का हवाला देते हुए चेरियन ने कहा था कि मुस्लिम बहुल इलाकों में मुस्लिम लीग को जीत मिली, जबकि हिंदू बहुल क्षेत्रों में भाजपा को सफलता हासिल हुई। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि खुद को धर्मनिरपेक्ष कहने वाले दलों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा और वामपंथ तथा कांग्रेस को सीमित सीटों पर ही संतोष करना पड़ा।

मंत्री चेरियन के इस बयान को राजनीतिक हलकों में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने वाला करार दिया गया। कांग्रेस ने इसे गंभीरता से लेते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि इस तरह की टिप्पणियां राज्य के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को नुकसान पहुंचा सकती हैं। केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने सवाल उठाया कि क्या यह बयान मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की जानकारी और सहमति से दिया गया था और क्या यह सीपीएम या एलडीएफ की आधिकारिक सोच को दर्शाता है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इस तरह के वक्तव्य समाज में धार्मिक आधार पर विभाजन को और गहरा कर सकते हैं।

विवाद बढ़ने के बाद मंत्री साजी चेरियन को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है और उनका उद्देश्य किसी समुदाय या पार्टी के खिलाफ टिप्पणी करना नहीं था। चेरियन के अनुसार, वे केवल चुनावी नतीजों के जरिए यह बताना चाहते थे कि राज्य में किस तरह का राजनीतिक ध्रुवीकरण देखने को मिल रहा है और भविष्य में इससे सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि सांप्रदायिकता का मुकाबला अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक किसी भी प्रकार की सांप्रदायिक राजनीति से नहीं, बल्कि वामपंथी और धर्मनिरपेक्ष विचारधारा को मजबूत करके किया जाना चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम ने केरल की राजनीति में धर्म और चुनावी रणनीति के बीच चल रही खींचतान को एक बार फिर उजागर कर दिया है। जहां भाजपा राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं मुस्लिम लीग अपने पारंपरिक जनाधार को बनाए रखने में जुटी है और कांग्रेस व वामपंथी दल धर्मनिरपेक्ष वोट बैंक को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। साजी चेरियन के बयान से उपजा यह विवाद आने वाले दिनों में राज्य की सियासत को किस दिशा में ले जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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