पूर्वोत्तर भारत के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में लगी भीषण जंगल की आग ने हाल ही में बड़े संकट का रूप ले लिया था, लेकिन भारतीय वायुसेना के त्वरित और समन्वित अभियान से समय रहते स्थिति पर काबू पा लिया गया। अरुणाचल प्रदेश के वालांग क्षेत्र में आग तेजी से फैल रही थी, जिससे वन संपदा और आसपास के इलाकों को गंभीर खतरा पैदा हो गया था। हालात की गंभीरता को देखते हुए भारतीय वायुसेना को सहायता के लिए बुलाया गया, जिसके बाद हेलीकॉप्टरों के जरिए बड़े पैमाने पर हवाई अग्निशमन अभियान शुरू किया गया।
इस अभियान के तहत वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने करीब 1.39 लाख लीटर पानी आग प्रभावित क्षेत्रों में गिराया। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, ऊंचाई, तेज हवाओं और सीमित दृश्यता के बावजूद पायलटों ने लगातार उड़ान भरकर जल स्रोतों से पानी भरकर आग पर डाला। नागालैंड की द्जूकू घाटी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी Mi-17 V5 हेलीकॉप्टरों की मदद से आग बुझाने की कोशिशें की गईं। इस दौरान स्थानीय प्रशासन, वन विभाग और आपदा प्रबंधन दलों के साथ समन्वय स्थापित कर अभियान को प्रभावी बनाया गया।
अधिकारियों के अनुसार, समय पर की गई हवाई कार्रवाई से आग को व्यापक तबाही मचाने से रोका जा सका और आसपास की बस्तियों तथा जैव विविधता को सुरक्षित रखने में सफलता मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में सूखे मौसम और तेज हवाओं के कारण जंगल की आग का खतरा बढ़ जाता है, ऐसे में वायुसेना की तत्परता और आधुनिक संसाधन आपदा प्रबंधन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस अभियान ने यह साबित कर दिया कि समन्वित प्रयास और तकनीकी क्षमता से बड़े संकट को भी टाला जा सकता है।




