नई शिक्षा नीति के तहत बदलाव पर बवाल, NCERT कंटेंट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

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नई दिल्ली: Supreme Court of India ने National Council of Educational Research and Training (NCERT) की कक्षा 8 की सोशल साइंस की नई पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े कंटेंट पर गंभीर आपत्ति जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी भी संवैधानिक संस्था को “बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।” यह मामला उस अध्याय को लेकर उठा है जिसमें न्यायपालिका के समक्ष मौजूद चुनौतियों, विशेषकर भ्रष्टाचार के आरोपों और लंबित मामलों की संख्या का उल्लेख किया गया है। अदालत ने संकेत दिया कि इस तरह की सामग्री छात्रों के मन में न्यायपालिका की छवि को लेकर नकारात्मक धारणा बना सकती है, जिसे सावधानीपूर्वक संतुलित ढंग से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

नई किताब के एक अध्याय में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और निचली अदालतों में लंबित मामलों के आंकड़ों का जिक्र किया गया है। इसमें बताया गया है कि देशभर की अदालतों में लाखों-करोड़ों मुकदमे विचाराधीन हैं और जजों की कमी, जटिल कानूनी प्रक्रियाएं तथा संसाधनों का अभाव जैसी वजहें इस समस्या को बढ़ाती हैं। साथ ही, न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों का भी संदर्भ दिया गया है। इस सामग्री को लेकर अदालत में वरिष्ठ वकीलों ने चिंता व्यक्त की, जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका की संस्थागत गरिमा बनाए रखना आवश्यक है और किसी भी प्रकार की एकतरफा या अतिरंजित प्रस्तुति स्वीकार्य नहीं होगी।

हालांकि, शैक्षणिक हलकों में इस बदलाव को नई शिक्षा नीति 2020 के तहत संस्थाओं की कार्यप्रणाली और चुनौतियों को विद्यार्थियों के सामने रखने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। समर्थकों का तर्क है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को समझाने के लिए उसकी शक्तियों के साथ-साथ चुनौतियों पर भी चर्चा जरूरी है, ताकि छात्रों में समग्र दृष्टिकोण विकसित हो सके। वहीं आलोचकों का कहना है कि इस उम्र के छात्रों के लिए विषय की प्रस्तुति संतुलित और संदर्भपूर्ण होनी चाहिए, ताकि वे न्यायपालिका जैसी महत्वपूर्ण संस्था के प्रति सम्मान और विश्वास बनाए रखें। फिलहाल इस मुद्दे पर कानूनी और शैक्षणिक समुदाय में बहस जारी है और आने वाले समय में इस पर आगे की कार्यवाही संभव है।

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