यरुशलम/तेल अवीव: Narendra Modi के इज़राइल दौरे का दूसरा दिन ऐतिहासिक और कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा। प्रधानमंत्री ने यरुशलम स्थित Yad Vashem स्मारक पहुंचकर होलोकॉस्ट के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की और मानवता के इतिहास के इस दर्दनाक अध्याय को याद किया। उन्होंने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर शांति, सह-अस्तित्व और वैश्विक सद्भाव का संदेश दिया।
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक में रक्षा, आंतरिक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कृषि नवाचार, जल प्रबंधन और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को और मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में आपसी व्यापार और निवेश बढ़ाने, स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को जोड़ने तथा उच्च तकनीक क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी।
वार्ता के दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को नए आयाम देने और क्षेत्रीय व वैश्विक चुनौतियों पर समन्वय बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। रक्षा सहयोग, उन्नत तकनीकी हस्तांतरण और नवाचार आधारित साझेदारी को संबंधों का प्रमुख स्तंभ बताया गया। साथ ही, कृषि और जल संरक्षण के क्षेत्र में इज़राइल की विशेषज्ञता तथा भारत के व्यापक बाजार और मानव संसाधन क्षमता के संयोजन को भविष्य के सहयोग का आधार माना गया।
दौरे का दूसरा दिन इस बात का संकेत देता है कि भारत और इज़राइल के रिश्ते केवल कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साझा रणनीतिक हितों और दीर्घकालिक सहयोग पर आधारित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक, व्यापार और नवाचार के क्षेत्रों में साझेदारी और अधिक गहरी होगी, जिससे द्विपक्षीय संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं।




