भारत सरकार जल्द ही अपने बहुप्रतीक्षित घरेलू कार्बन ट्रेडिंग सिस्टम की शुरुआत करने जा रही है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने घोषणा की है कि देश में अगले चार महीनों के भीतर कार्बन मार्केट में ट्रेडिंग शुरू हो जाएगी। यह कदम भारत के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने और उद्योगों को कम कार्बन उत्सर्जन की दिशा में प्रेरित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार ने इसके लिए कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) का ढांचा पहले ही तैयार कर लिया है, जिसे जून 2023 में अधिसूचित किया गया था, और इसके तहत उत्सर्जन की निगरानी के लिए एक मजबूत मेजरमेंट, रिपोर्टिंग और वेरिफिकेशन (MRV) प्रणाली भी विकसित की गई है।
इस कार्बन बाजार के तहत कंपनियां अपने उत्सर्जन स्तर के आधार पर कार्बन क्रेडिट खरीद और बेच सकेंगी। जिन कंपनियों का उत्सर्जन निर्धारित सीमा से कम होगा, वे अतिरिक्त क्रेडिट बेच सकेंगी, जबकि अधिक उत्सर्जन करने वाली कंपनियों को क्रेडिट खरीदना होगा। इस व्यवस्था से उद्योगों को प्रदूषण कम करने के लिए आर्थिक रूप से प्रोत्साहन मिलेगा। योजना के संचालन की जिम्मेदारी ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) को दी गई है, जबकि ग्रिड इंडिया को रजिस्ट्री का कार्य सौंपा गया है, जिससे पूरे सिस्टम में पारदर्शिता और दक्षता बनी रहे।
सरकार ने शुरुआती चरण में सीमेंट, एल्यूमीनियम, पेट्रोकेमिकल, रिफाइनरी और टेक्सटाइल जैसे ऊर्जा-गहन क्षेत्रों को इसमें शामिल किया है। इन क्षेत्रों की सैकड़ों कंपनियों को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य दिए जाएंगे, जिन्हें आने वाले वर्षों में लागू किया जाएगा। यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम है, बल्कि इससे भारतीय उद्योगों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनने में भी मदद मिलेगी, खासकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार कार्बन उत्सर्जन को लेकर सख्त नियम लागू कर रहे हैं।
भारत का लक्ष्य वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करना है और घरेलू कार्बन बाजार इस दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके माध्यम से हरित ऊर्जा, नई तकनीकों और निवेश को बढ़ावा मिलेगा, जिससे देश में सतत विकास को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही सरकार ने कार्बन मार्केट के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म भी तैयार किया है, जहां कंपनियां पंजीकरण कर ट्रेडिंग में भाग ले सकेंगी। कुल मिलाकर, यह पहल भारत को पर्यावरणीय जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।




