दिवालियापन मामलों में तेजी लाने के लिए नए नियम लागू, जुर्माने का प्रावधान

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संसद के बजट सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने दिवालियापन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) में महत्वपूर्ण संशोधन पेश किया। लोकसभा में चर्चा के दौरान वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने स्पष्ट किया कि कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त प्रावधान किए जा रहे हैं, जिनमें गलत तरीके से दिवालियापन प्रक्रिया का सहारा लेने वालों पर जुर्माना लगाने का प्रावधान शामिल है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में अनावश्यक मुकदमेबाजी और प्रक्रियात्मक देरी के कारण समाधान में समय लगता है, जिसे खत्म करने के लिए यह संशोधन आवश्यक है।

वित्त मंत्री ने बताया कि नए प्रावधानों के तहत किसी भी दिवालियापन आवेदन को स्वीकार करने पर अधिकतम 14 दिनों के भीतर निर्णय लेना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य शुरुआती स्तर पर ही मामलों में होने वाली देरी को रोकना और प्रक्रिया को तेज बनाना है। उन्होंने यह भी कहा कि National Company Law Tribunal (NCLT) को इस समयसीमा का पालन करना होगा, जिससे लंबित मामलों की संख्या में कमी आएगी और ऋणदाताओं तथा निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।

अपने संबोधन में सीतारमण ने यह भी रेखांकित किया कि 2016 में लागू IBC ने भारतीय बैंकिंग प्रणाली को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। इस कानून के माध्यम से बड़ी संख्या में फंसे हुए कर्जों का समाधान संभव हुआ है और बैंकों को उल्लेखनीय वसूली हासिल हुई है। सरकार का मानना है कि प्रस्तावित संशोधन से न केवल दिवालियापन प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि समूह दिवालियापन और अंतरराष्ट्रीय मामलों को भी अधिक व्यवस्थित तरीके से निपटाया जा सकेगा।

लोकसभा द्वारा इस संशोधन विधेयक को पारित किया जाना आर्थिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी, निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और देश के वित्तीय तंत्र को और मजबूती ।

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