ATF कीमतों में तेज उछाल, फ्लाइट्स का किराया बढ़ना लगभग तय

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भारत में हवाई यात्रा आने वाले दिनों में महंगी हो सकती है, क्योंकि एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट ईंधन की कीमतों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अप्रैल 2026 में हुए ताजा संशोधन के बाद पहली बार घरेलू उड़ानों के लिए जेट ईंधन की कीमत 2 लाख रुपये प्रति किलोलीटर के पार पहुंच गई है। राजधानी दिल्ली में इसकी कीमत करीब 2.07 लाख रुपये प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई, जो पिछले स्तरों की तुलना में बेहद तेज उछाल को दर्शाती है।

इस बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। खासकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को ऊपर धकेला है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ा है, जहां विमानन क्षेत्र के लिए ईंधन लागत तेजी से बढ़ गई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, जेट ईंधन एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत का लगभग 30 से 45 प्रतिशत हिस्सा होता है। ऐसे में ATF की कीमतों में इतनी बड़ी वृद्धि से एयरलाइंस कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ना तय है। इस दबाव को कम करने के लिए कंपनियां हवाई किराए में बढ़ोतरी कर सकती हैं या ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) बढ़ा सकती हैं, जिसका सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ेगा।

स्थिति को और जटिल बनाने में रुपये की कमजोरी भी एक अहम कारक है, क्योंकि विमानन उद्योग से जुड़े कई खर्च डॉलर में होते हैं। इसके अलावा, लंबी दूरी की उड़ानों में ईंधन की अधिक खपत भी एयरलाइंस की लागत बढ़ा रही है।

सरकार इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और राहत देने के लिए कुछ कदम भी उठाए गए हैं, जिनमें ATF निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाना और राज्यों से वैट कम करने की अपील शामिल है। हालांकि, यदि वैश्विक तेल कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो भारत में हवाई यात्रा और महंगी होना लगभग तय माना जा रहा है।

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