पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच Donald Trump ने दावा किया है कि अमेरिका ईरान को कभी परमाणु शक्ति नहीं बनने देगा और हालिया सैन्य कार्रवाई में उसकी सैन्य क्षमता को लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान की नौसेना, वायुसेना, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और कई प्रमुख सैन्य ठिकानों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है, जिससे युद्ध के रणनीतिक लक्ष्य लगभग हासिल कर लिए गए हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि हालात ऐसे ही बने रहते हैं तो आने वाले कुछ हफ्तों में सैन्य अभियान समाप्त किया जा सकता है।
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इस पूरे अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तेहरान बातचीत के लिए आगे नहीं आता, तो अमेरिका ऊर्जा और तेल से जुड़े महत्वपूर्ण ढांचों को भी निशाना बना सकता है। हालांकि, जमीनी स्थिति ट्रंप के दावों से पूरी तरह मेल नहीं खाती। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी हमलों के बावजूद ईरान अभी भी जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम है और उसने कई इलाकों में मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हैं।
अमेरिकी खुफिया आकलनों में भी यह सामने आया है कि ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसके मिसाइल भंडार का केवल एक हिस्सा ही नष्ट किया जा सका है, जबकि बड़ी मात्रा अब भी सक्रिय या सुरक्षित स्थिति में है। यह स्थिति इस बात का संकेत देती है कि संघर्ष अभी समाप्त होने से दूर है और क्षेत्र में तनाव बरकरार रह सकता है।
उल्लेखनीय है कि यह सैन्य टकराव 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जिसका घोषित उद्देश्य ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को खत्म करना और पश्चिम एशिया में सुरक्षा संतुलन बनाए रखना था। हालांकि, इस संघर्ष के चलते न केवल क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ी है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इसके प्रभाव देखने को मिल रहे हैं, खासकर तेल की कीमतों में उछाल और आर्थिक अनिश्चितता के रूप में। कुल मिलाकर, जहां एक ओर अमेरिकी प्रशासन इसे अपनी बड़ी रणनीतिक सफलता बता रहा है, वहीं दूसरी ओर विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान की शेष सैन्य क्षमता और परमाणु कार्यक्रम अभी भी अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बना हुआ है।




