पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार अस्थिरता बनी हुई है। ताज़ा कारोबार में अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 106 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि WTI (West Texas Intermediate) क्रूड 103–104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। दिन की शुरुआत में कीमतों में कुछ गिरावट देखी गई थी, लेकिन बाद में Donald Trump के सख्त बयान और ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई के संकेतों के बाद बाजार में फिर तेजी लौट आई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस उतार-चढ़ाव की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और खास तौर पर Strait of Hormuz को लेकर बढ़ी आशंकाएं हैं। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा नियंत्रित करता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा या सैन्य गतिविधि का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पड़ता है। मौजूदा हालात में आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना हुआ है, जिससे बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है।
इस अस्थिरता का असर भारत समेत कई देशों के ईंधन बाजार पर भी दिखने लगा है। निजी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू कर दी है, जबकि आम उपभोक्ताओं पर इसका असर धीरे-धीरे दिखने की संभावना है। फिलहाल सरकारी स्तर पर व्यापक बदलाव नहीं किए गए हैं, लेकिन यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो घरेलू बाजार में भी ईंधन महंगा हो सकता है।
कुल मिलाकर, वैश्विक तेल बाजार इस समय पूरी तरह भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर नजर आ रहा है। जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तब तक कच्चे तेल की कीमतों में इसी तरह का उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है, और आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक संवेदनशील हो सकती है।




