वैश्विक मंच पर भारत की आवाज बुलंद, UNSC सुधार में समानता पर जोर

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार को लेकर भारत ने एक बार फिर अपना स्पष्ट और दृढ़ रुख सामने रखा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने अंतर-सरकारी वार्ताओं (IGN) के दौरान कहा कि “दो-स्तरीय स्थायी सदस्यता” का प्रस्ताव न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि यह वैश्विक समानता और न्याय के मूल सिद्धांतों के भी खिलाफ है। उनके अनुसार, यदि नए स्थायी सदस्यों को बिना वीटो अधिकार के शामिल किया जाता है, तो इससे एक ऐसी व्यवस्था बनेगी जो असमानता को बढ़ावा देगी और सुधार की मूल भावना को कमजोर करेगी।

पी. हरीश ने स्पष्ट रूप से कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वास्तविक सुधार तभी संभव है, जब नए स्थायी सदस्यों को मौजूदा स्थायी सदस्यों के समान अधिकार दिए जाएं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वीटो अधिकार से वंचित स्थायी सदस्यता “अधूरी” होगी और इससे वैश्विक शक्ति संतुलन में कोई ठोस बदलाव नहीं आएगा। वर्तमान में अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे पांच स्थायी सदस्य वीटो अधिकार रखते हैं, जो कई बार वैश्विक निर्णयों को प्रभावित करता है।

भारत ने इस मुद्दे पर G4 (भारत, ब्राज़ील, जर्मनी और जापान) के प्रस्ताव का समर्थन किया है। इस प्रस्ताव के तहत सुझाव दिया गया है कि नए स्थायी सदस्यों को तुरंत वीटो अधिकार देने के बजाय 15 वर्षों के लिए इसे स्थगित रखा जा सकता है। इसे एक संतुलित और व्यावहारिक समाधान माना जा रहा है, जिससे सुधार प्रक्रिया में गतिरोध टूट सकता है और सभी पक्षों के बीच सहमति बन सकती है।

भारत का मानना है कि वर्तमान सुरक्षा परिषद की संरचना 1945 के बाद की वैश्विक परिस्थितियों को दर्शाती है, जो आज के बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के अनुरूप नहीं है। दुनिया अब बहुध्रुवीय हो चुकी है और विकासशील देशों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में UNSC में व्यापक सुधार कर इसे अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाना जरूरी हो गया है।

भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद के विस्तार और उसमें अपनी स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। इस दिशा में G4 देशों का सहयोग भारत के प्रयासों को मजबूती देता है। कुल मिलाकर, भारत का रुख यह स्पष्ट करता है कि वह केवल संख्या बढ़ाने के पक्ष में नहीं है, बल्कि वह समान अधिकार, पारदर्शिता और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व पर आधारित एक मजबूत और प्रभावी संयुक्त राष्ट्र प्रणाली चाहता है।

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