महिला आरक्षण को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस ने एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस मुद्दे पर पार्टी की स्थिति पहले से ही साफ है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष Sonia Gandhi ने कहा कि महिला आरक्षण पर पार्टी अपनी बात स्पष्ट कर चुकी है और अब इस पर कुछ नया कहने के लिए शेष नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा विवाद का केंद्र महिला आरक्षण नहीं, बल्कि उससे जुड़ा परिसीमन (डिलिमिटेशन) है, जिसे लेकर कांग्रेस को गंभीर आपत्तियां हैं। सोनिया गांधी का मानना है कि परिसीमन की प्रक्रिया को जिस तरह से आगे बढ़ाया जा रहा है, वह भविष्य में राजनीतिक प्रतिनिधित्व के संतुलन को प्रभावित कर सकती है, इसलिए इस पर व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी है।
वहीं कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने भी पार्टी की इसी लाइन को दोहराते हुए कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि उसके क्रियान्वयन के तरीके पर सवाल उठा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना उचित नहीं है। खरगे ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है और प्रस्तावित प्रक्रिया राजनीतिक रूप से प्रेरित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष इस विषय को संसद में मजबूती से उठाएगा और सरकार से स्पष्ट जवाब मांगेगा।
कांग्रेस का कहना है कि महिला आरक्षण को बिना किसी अतिरिक्त शर्त के लागू किया जाना चाहिए, जैसा कि पहले पारित कानून में प्रावधान किया गया था। पार्टी के अन्य नेताओं ने भी दोहराया कि वे महिलाओं को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के पक्षधर हैं, लेकिन परिसीमन के जरिए संभावित राजनीतिक असंतुलन पैदा करने के प्रयास का विरोध करेंगे। कांग्रेस ने यह भी जोर दिया कि किसी भी बड़े बदलाव से पहले जनगणना और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करना जरूरी है।
कुल मिलाकर, कांग्रेस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह महिला आरक्षण के सिद्धांत के साथ मजबूती से खड़ी है, लेकिन परिसीमन को लेकर उसकी चिंताएं बनी हुई हैं। यही वजह है कि पार्टी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति अपना रही है, जिससे आने वाले समय में संसद में इस विषय पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।




