पश्चिम एशिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग Strait of Hormuz में अमेरिकी नाकेबंदी के बाद हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। United States Central Command (सेंटकॉम) के अनुसार, नाकेबंदी लागू होने के बाद से अब तक 21 जहाजों को वापस ईरान की ओर लौटना पड़ा है, जिससे क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण का संकेत मिलता है। अमेरिका ने यह कदम ईरान पर आर्थिक और रणनीतिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया है, जिसके तहत ईरानी बंदरगाहों से जुड़े समुद्री व्यापार को सीमित करने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य व्यावसायिक जहाजों के लिए “पूरी तरह खुला” है, लेकिन जमीनी स्थिति इससे कुछ अलग दिखाई देती है। जहाजों की आवाजाही अब भी कड़ी निगरानी और निर्धारित मार्गों के तहत ही संभव हो पा रही है। ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी दबाव जारी रहता है तो वह इस रणनीतिक मार्ग को फिर से बंद करने जैसे कदम उठा सकता है। इस कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और तेल बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी का परिवहन इसी रास्ते से होता है। ऐसे में यहां पैदा हुआ तनाव सीधे वैश्विक बाजारों, खासकर तेल की कीमतों पर असर डालता है। हाल के घटनाक्रमों के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और निवेशकों की चिंताएं बढ़ी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल स्थिति “आंशिक रूप से सामान्य लेकिन जोखिमपूर्ण” बनी हुई है। एक ओर सीमित स्तर पर जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हुई है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी नाकेबंदी, सैन्य गतिविधियों और संभावित सुरक्षा खतरों के कारण यह क्षेत्र अभी भी अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में यहां की स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।




