नई दिल्ली: Indian Navy के प्रमुख Admiral Dinesh Kumar Tripathi ने स्पष्ट कहा है कि हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की प्रमुख जिम्मेदारी है और इसके लिए मित्र देशों के साथ सक्रिय साझेदारी बेहद जरूरी है। नौसेना कमांडर्स सम्मेलन 2026 के दौरान उन्होंने बदलते वैश्विक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्रीय संघर्ष, गैर-राज्यीय खतरे और समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिमों ने इस क्षेत्र को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में भारत को एक “विश्वसनीय सुरक्षा भागीदार” के रूप में अपनी भूमिका निभाते हुए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करना होगा।
सम्मेलन के दौरान भारतीय नौसेना की नई समुद्री सुरक्षा रणनीति 2026 भी प्रस्तुत की गई, जिसमें आने वाले वर्षों के लिए व्यापक रोडमैप तैयार किया गया है। इस रणनीति में राष्ट्रीय हितों की रक्षा, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखना और आधुनिक तकनीकों के जरिए नौसेना की क्षमताओं को सशक्त करना प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं। साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और हिंद महासागर में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के चलते भारत को अपनी परिचालन तैयारियों को लगातार मजबूत बनाए रखना होगा।
नौसेना प्रमुख ने यह भी कहा कि समुद्री सुरक्षा केवल सैन्य ताकत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए साझेदारी, सूचनाओं के आदान-प्रदान और संयुक्त अभियानों की आवश्यकता होती है। इसी दिशा में भारत मित्र देशों के साथ सहयोग बढ़ाकर क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनाए रखने की दिशा में काम कर रहा है। हाल के वर्षों में भारतीय नौसेना ने समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के लिए सक्रिय तैनाती बढ़ाई है, जिससे देश की आर्थिक सुरक्षा को भी मजबूती मिली है।
कुल मिलाकर, यह स्पष्ट संकेत है कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक भूमिका को और सशक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से इस क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा और संतुलन बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।




