ईरान में मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट्स और विश्लेषणों के अनुसार, Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने देश की सैन्य व्यवस्था के साथ-साथ विदेश नीति पर भी अपना प्रभाव काफी बढ़ा लिया है। इस पूरी प्रक्रिया में IRGC के वरिष्ठ कमांडर Ahmad Vahidi एक केंद्रीय भूमिका में उभरकर सामने आए हैं और उन्हें अब रणनीतिक फैसलों का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि हाल के समय में ईरान के भीतर मध्यमार्गी और कूटनीतिक नेतृत्व की भूमिका कमजोर हुई है। पारंपरिक रूप से विदेश नीति संभालने वाले राजनीतिक नेताओं की जगह अब सैन्य नेतृत्व अधिक प्रभावी हो गया है। कई मौकों पर देखा गया कि कूटनीतिक स्तर पर लिए गए निर्णयों को IRGC ने पलट दिया, खासकर रणनीतिक क्षेत्रों और सैन्य कार्रवाइयों से जुड़े मामलों में। इससे यह संकेत मिलता है कि देश की नीतिगत दिशा अब अधिक सख्त और सुरक्षा-केंद्रित होती जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि पिछले कुछ महीनों में बढ़ते संघर्ष, बाहरी दबाव और आंतरिक सत्ता संतुलन में बदलाव के कारण IRGC का प्रभाव लगातार मजबूत हुआ है। शीर्ष नेतृत्व में बदलाव और सुरक्षा चुनौतियों ने सैन्य ढांचे को अधिक निर्णायक बना दिया है, जिससे एक तरह की केंद्रीकृत निर्णय प्रणाली उभरकर सामने आई है। इस व्यवस्था में अहमद वाहिदी और उनके करीबी अधिकारी रणनीतिक और कूटनीतिक दोनों तरह के फैसलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
इस शक्ति परिवर्तन का असर ईरान की विदेश नीति पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ बातचीत की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है और कई मामलों में टकराव की स्थिति बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक IRGC का प्रभाव इसी तरह बना रहता है, तब तक कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं सीमित रह सकती हैं।
कुल मिलाकर, ईरान में मौजूदा हालात यह दर्शाते हैं कि नागरिक शासन की तुलना में सैन्य नेतृत्व का दबदबा तेजी से बढ़ रहा है। Ahmad Vahidi के नेतृत्व में IRGC अब न केवल सुरक्षा बल्कि विदेश नीति से जुड़े अहम फैसलों का भी मुख्य केंद्र बन गया है, जिसका प्रभाव आने वाले समय में क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।



