उत्तर प्रदेश में गेहूं खरीद को लेकर किसानों को बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश पर राज्य सरकार ने एक अहम निर्णय लिया है। अब किसान बिना “फार्मर रजिस्ट्री” के भी सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेच सकेंगे। पहले यह अनिवार्य था कि किसान पहले ऑनलाइन या ऑफलाइन पंजीकरण कराएं, तभी उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अपनी उपज बेचने की अनुमति मिलती थी। इस व्यवस्था के कारण बड़ी संख्या में किसान, खासकर छोटे और सीमांत किसान, खरीद प्रक्रिया से बाहर रह जाते थे और उन्हें खुले बाजार में कम दाम पर फसल बेचने को मजबूर होना पड़ता था।
सरकार ने किसानों की इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए नियमों में ढील दी है और अब क्रय केंद्रों पर ही “ऑन-द-स्पॉट” रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसका मतलब है कि किसान सीधे केंद्र पर पहुंचकर अपने पहचान पत्र और भूमि संबंधी दस्तावेजों के आधार पर तुरंत पंजीकरण करा सकते हैं और उसी दिन या निर्धारित समय के भीतर अपनी उपज बेच सकते हैं। इस नई व्यवस्था से उन किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जो तकनीकी कारणों या जानकारी के अभाव में पहले पंजीकरण नहीं करा पाए थे।
रबी विपणन वर्ष 2026-27 के तहत राज्य में गेहूं खरीद अभियान 30 मार्च से शुरू हो चुका है और यह 15 जून तक जारी रहेगा। इस दौरान प्रदेशभर में हजारों सरकारी क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां किसानों से ₹2585 प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ना और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है।
खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए राज्य सरकार ने डिजिटल भुगतान प्रणाली को भी सख्ती से लागू किया है। इसके तहत किसानों को गेहूं बेचने के 48 घंटे के भीतर सीधे उनके बैंक खाते में भुगतान किया जा रहा है। इसके अलावा क्रय केंद्रों पर पेयजल, छाया, बैठने की व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कई जिलों से किसानों की शिकायतें सामने आ रही थीं कि रजिस्ट्री न होने के कारण उन्हें सरकारी खरीद केंद्रों से वापस लौटाया जा रहा है। ऐसे में सरकार का यह कदम न केवल किसानों की परेशानी कम करेगा, बल्कि खरीद प्रक्रिया को भी अधिक सरल और प्रभावी बनाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से राज्य में गेहूं खरीद की गति बढ़ेगी और अधिक किसानों को MSP का लाभ मिल सकेगा।



