राज्यसभा में BJP की ऐतिहासिक बढ़त, AAP के 7 सांसदों के विलय को मंजूरी

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BJP की बढ़त से बदला गणित, NDA को मजबूती; AAP को झटका

Reported by:- निखिल रस्तोगी

नई दिल्ली : राज्यसभा में सोमवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब आम आदमी पार्टी (AAP) के सात बागी सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय को सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने मंजूरी दे दी। मंजूरी मिलते ही सातों सांसद आधिकारिक तौर पर बीजेपी के खेमे में शामिल हो गए और इसके साथ ही सदन का सियासी गणित बदल गया।

इस विलय के बाद राज्यसभा में बीजेपी की संख्या 106 से बढ़कर 113 हो गई है, जबकि NDA का कुल आंकड़ा 145 के पार पहुंच गया है। इसके उलट, अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली AAP अब राज्यसभा में महज 3 सांसदों तक सिमट गई है।

ऐतिहासिक स्थिति में BJP 

राज्यसभा में बीजेपी अब ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचती दिख रही है। पार्टी के अपने 113 सांसद हो गए हैं। अगर सात मनोनीत सदस्यों और दो निर्दलीयों का समर्थन जोड़ दिया जाए, तो बीजेपी बिना सहयोगी दलों के भी बहुमत के आंकड़े 123 से केवल एक कदम दूर रह जाती है।

गौरतलब है कि इससे पहले आखिरी बार 1988 में कांग्रेस को राज्यसभा में अपने दम पर बहुमत हासिल था। यानी करीब चार दशकों में कोई भी दल अकेले इस स्थिति के करीब नहीं पहुंच पाया था। अब बीजेपी धीरे-धीरे उस स्तर की ओर बढ़ती नजर आ रही है।

क्या है पूरा घटनाक्रम

शुक्रवार को इन सातों सांसदों ने कांस्टीट्यूशन क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर AAP से अलग होने का ऐलान किया था और बीजेपी में शामिल होने के लिए राज्यसभा सचिवालय को पत्र सौंपा था। सोमवार को सभापति ने इस विलय को औपचारिक मंजूरी दे दी।

कौन-कौन शामिल

बीजेपी में शामिल होने वाले सांसदों में डॉ. अशोक कुमार मित्तल, राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, डॉ. संदीप कुमार पाठक, डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता शामिल हैं।

संख्याबल का गणित

राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 245 (233 निर्वाचित और 12 मनोनीत) है। इस बदलाव के बाद बीजेपी 113 के आंकड़े पर पहुंच गई है, जबकि AAP घटकर 3 सदस्यों तक सीमित रह गई है।

कानूनी स्थिति

यह विलय दो-तिहाई से अधिक सांसदों के समर्थन से हुआ है, इसलिए यह दल-बदल विरोधी कानून के दायरे में नहीं आता और संवैधानिक रूप से वैध माना जाता है।

राजनीतिक मायने

AAP के भीतर यह बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे प्रमुख चेहरे पार्टी से अलग हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस घटनाक्रम को आगामी चुनावों, खासकर पंजाब विधानसभा चुनाव के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। अब देखना होगा कि राज्यसभा में बढ़ी इस ताकत को बीजेपी किस तरह राजनीतिक और चुनावी बढ़त में बदल पाती है।

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