रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस ने 8 मई से 10 मई तक अस्थायी युद्धविराम की घोषणा कर वैश्विक स्तर पर नई चर्चा छेड़ दी है। रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की वर्षगांठ यानी “विक्ट्री डे” समारोह के अवसर पर यह सीजफायर लागू करने का फैसला लिया है। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस अवधि के दौरान रूसी सेना सभी प्रमुख सैन्य अभियानों, मिसाइल हमलों और ड्रोन स्ट्राइक को रोक देगी। हालांकि मॉस्को ने स्पष्ट किया है कि यदि यूक्रेन की ओर से किसी प्रकार का हमला किया गया तो रूस उसका जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार रहेगा।
रूस की इस घोषणा के बाद यूक्रेन ने इसे केवल प्रतीकात्मक कदम बताते हुए सवाल खड़े किए हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने कहा कि यदि रूस वास्तव में शांति चाहता है तो उसे तीन दिन के सीमित युद्धविराम के बजाय स्थायी और व्यापक संघर्षविराम की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। यूक्रेन का आरोप है कि रूस पहले भी कई बार अस्थायी युद्धविराम की घोषणा कर चुका है, लेकिन जमीन पर सैन्य हमले जारी रहे। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच ड्रोन और मिसाइल हमले तेज हुए हैं, जिससे हालात और तनावपूर्ण बने हुए हैं।
रिपोर्टों के अनुसार रूस ने मॉस्को में होने वाले विक्ट्री डे समारोह की सुरक्षा भी काफी बढ़ा दी है। आशंका जताई जा रही है कि यूक्रेन इस दौरान रूसी राजधानी को निशाना बनाने की कोशिश कर सकता है। इसी कारण रूस ने परेड और अन्य सार्वजनिक आयोजनों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि इस बार सैन्य परेड में भारी हथियारों और टैंकों के प्रदर्शन को भी सीमित किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्धविराम मानवीय पहल से ज्यादा राजनीतिक और रणनीतिक महत्व रखता है। हो सकता है कि रूस अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश देना चाहता हो कि वह शांति वार्ता के लिए तैयार है, जबकि दूसरी ओर यूक्रेन और पश्चिमी देश इसे केवल छवि सुधारने की कोशिश मान रहे हैं। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह तीन दिन का संघर्षविराम वास्तव में जमीन पर लागू हो पाएगा या फिर दोनों देशों के बीच अविश्वास और सैन्य कार्रवाई पहले की तरह जारी रहेगी।




