‘गुरुदेव की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक’, रवींद्र जयंती पर पीएम मोदी का संदेश

SHARE:

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने गुरुदेव Rabindranath Tagore की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वह भारत की “सभ्यतागत चेतना के प्रतीक” थे, जिनकी रचनाएं और विचार आज भी देश और दुनिया को प्रेरित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि गुरुदेव ने भारतीय संस्कृति, साहित्य और मानवता के मूल्यों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि टैगोर का जीवन और उनकी शिक्षाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।

पीएम मोदी ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर केवल एक कवि या साहित्यकार नहीं थे, बल्कि वह एक महान चिंतक, दार्शनिक, शिक्षाविद और समाज सुधारक भी थे। उन्होंने भारतीय समाज को आत्मविश्वास, सांस्कृतिक गौरव और आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरुदेव की रचनाओं में भारतीय परंपरा, प्रकृति प्रेम, मानवीय संवेदनाएं और विश्वबंधुत्व की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने देशवासियों से गुरुदेव के आदर्शों को अपनाने और समाज में सद्भाव, शिक्षा तथा मानवता के मूल्यों को मजबूत करने का आह्वान किया।

रवींद्रनाथ टैगोर भारतीय पुनर्जागरण के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं। वर्ष 1913 में उन्हें उनकी प्रसिद्ध कृति ‘गीतांजलि’ के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था, जिससे वह एशिया के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता बने। उन्होंने कविता, गीत, कहानी, नाटक और कला के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया। भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और बांग्लादेश का राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ भी उनकी ही रचनाएं हैं। टैगोर ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किया और शांति निकेतन की स्थापना कर भारतीय शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देने का प्रयास किया।

रवींद्र जयंती के अवसर पर देशभर में कई सांस्कृतिक और साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में विद्यालयों, विश्वविद्यालयों और सांस्कृतिक संस्थानों में रवींद्र संगीत, कविता पाठ, नृत्य-नाटिका और विचार गोष्ठियों का आयोजन हुआ। लोगों ने गुरुदेव की रचनाओं के माध्यम से उनकी विचारधारा को याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah समेत कई नेताओं और सांस्कृतिक हस्तियों ने भी गुरुदेव को नमन किया। नेताओं ने कहा कि टैगोर का मानवता, राष्ट्रवाद और विश्व शांति का संदेश आज के समय में और अधिक प्रासंगिक हो गया है। उनकी रचनाएं भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती ।

Leave a Comment