युद्ध खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम? पुतिन ने तीसरे देश में बैठक का प्रस्ताव रखा

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रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि वह यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy से किसी तीसरे देश में मुलाकात करने के लिए तैयार हैं। हालांकि पुतिन ने स्पष्ट किया कि यह बैठक केवल अंतिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के उद्देश्य से होगी। मॉस्को में विजय दिवस समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि रूस युद्ध समाप्त करने और स्थायी समाधान निकालने के लिए बातचीत को तैयार है, लेकिन समझौता ऐसा होना चाहिए जो लंबे समय तक शांति सुनिश्चित कर सके। पुतिन के इस बयान को रूस-यूक्रेन संघर्ष में संभावित कूटनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के बीच 9 से 11 मई तक अस्थायी युद्धविराम लागू किया गया है। इस दौरान दोनों देशों ने युद्धबंदियों की अदला-बदली पर भी सहमति जताई है। हालांकि युद्धविराम के बावजूद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर सीमित हमलों और समझौते के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पहल को शांति प्रक्रिया की दिशा में अहम कदम बताया है। वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि यदि रूस और यूक्रेन के बीच प्रत्यक्ष वार्ता आगे बढ़ती है, तो इससे लंबे समय से जारी युद्ध को समाप्त करने का रास्ता खुल सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि तीसरे देश में बैठक का प्रस्ताव रूस की नई कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। इससे पहले भी स्विट्जरलैंड और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में शांति वार्ता के प्रयास हो चुके हैं, लेकिन डोनबास क्षेत्र और कब्जे वाले इलाकों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अब भी बने हुए हैं। रूस जहां कुछ क्षेत्रों पर अपने नियंत्रण को मान्यता दिलाना चाहता है, वहीं यूक्रेन अपनी क्षेत्रीय अखंडता से किसी भी प्रकार का समझौता करने के पक्ष में नहीं है। इसी कारण शांति वार्ता की राह अब भी कठिन मानी जा रही है।

यूरोपीय देशों और नाटो ने पुतिन के बयान पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है। पश्चिमी देशों का कहना है कि वास्तविक शांति तभी संभव होगी जब रूस युद्धविराम का पूरी तरह पालन करे और यूक्रेन की संप्रभुता का सम्मान करे। करीब चार साल से जारी इस युद्ध में लाखों लोग प्रभावित हुए हैं और भारी आर्थिक व मानवीय नुकसान हुआ है। ऐसे में पुतिन का यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है और अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह पहल वास्तव में स्थायी शांति का रास्ता खोल पाएगी।

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