‘कोई जान-माल का नुकसान न हो’, आपदा तैयारियों पर अमित शाह सख्त

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देश में बढ़ती गर्मी, हीटवेव और मानसून के दौरान संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने नई दिल्ली में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर आपदा प्रबंधन की तैयारियों का आकलन किया। बैठक में बाढ़, लू और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। अमित शाह ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे जल्द से जल्द “फ्लड क्राइसिस मैनेजमेंट टीम” का गठन करें और उन्हें पूरी तरह सक्रिय रखें, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू किए जा सकें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के “जीरो कैजुअल्टी डिजास्टर मैनेजमेंट” विजन को सफल बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा।

गृह मंत्री ने जोर देकर कहा कि आपदा प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं और चेतावनी प्रणालियों का लाभ गांव और जिला स्तर तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने राज्यों को बाढ़ पूर्वानुमान और मौसम संबंधी सूचनाओं के लिए एकीकृत व्यवस्था विकसित करने की सलाह दी, ताकि समय रहते लोगों को अलर्ट जारी किया जा सके और जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके। अमित शाह ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) को यह भी निर्देश दिया कि वह यह आकलन करे कि कितने राज्य केंद्र सरकार और एनडीएमए द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन कर रहे हैं।

बैठक में हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों से बढ़ते खतरे पर भी विशेष चिंता व्यक्त की गई। गृह मंत्री ने जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में संवेदनशील ग्लेशियर झीलों के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पैटर्न तेजी से बदल रहे हैं, जिससे बाढ़, भूस्खलन और अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में आधुनिक तकनीक और रियल टाइम मॉनिटरिंग के जरिए पहले से चेतावनी देना बेहद जरूरी हो गया है।

अमित शाह ने लू से निपटने की तैयारियों की भी समीक्षा की और राज्यों को निर्देश दिया कि हीटवेव का असर आम लोगों और कृषि क्षेत्र पर कम से कम हो, इसके लिए स्थानीय स्तर पर विशेष तैयारी की जाए। उन्होंने जल संरक्षण, चेक डैम निर्माण और भूजल स्तर सुधारने पर जोर देते हुए कहा कि पानी बचाने के प्रयास भविष्य में सूखे और भीषण गर्मी के प्रभाव को कम करने में मदद करेंगे। गृह मंत्री ने CAMPA फंड के बेहतर उपयोग और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी परियोजनाओं को तेजी से लागू करने की भी बात कही।

इस बैठक में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), भारतीय मौसम विभाग (IMD), केंद्रीय जल आयोग (CWC), राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और कई केंद्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। गृह मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि मौसम संबंधी चेतावनियों और आपदा से जुड़ी सूचनाओं को अधिक प्रभावी तरीके से आम लोगों तक पहुंचाया जाए, ताकि समय रहते लोग सुरक्षित स्थानों पर जा सकें और किसी भी संभावित आपदा में जान-माल के नुकसान को रोका जा सके।

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