भारत के रक्षा मंत्री Rajnath Singh सोमवार से वियतनाम और दक्षिण कोरिया के चार दिवसीय दौरे पर रवाना हो गए हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक और रक्षा साझेदारियों को लगातार मजबूत करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के साथ सैन्य सहयोग, समुद्री सुरक्षा, रक्षा उत्पादन और तकनीकी साझेदारी को नई मजबूती देना है। भारत की “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” के तहत इस दौरे को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच भारत अपने सहयोगी देशों के साथ रणनीतिक संबंधों को और गहरा करना चाहता है।
दौरे के पहले चरण में रक्षा मंत्री वियतनाम की राजधानी हनोई पहुंचेंगे, जहां वह वियतनाम के रक्षा मंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ उच्चस्तरीय वार्ता करेंगे। भारत और वियतनाम के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच नौसैनिक सहयोग, संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा प्रशिक्षण और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में लगातार सहयोग बढ़ा है। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सौदे को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है। यदि यह समझौता आगे बढ़ता है तो फिलीपींस के बाद वियतनाम ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दूसरा दक्षिण-पूर्व एशियाई देश बन सकता है। इसके अलावा भारत वियतनाम की नौसेना और वायुसेना के आधुनिकीकरण में भी तकनीकी सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम उठा सकता है।
वियतनाम यात्रा के बाद South Korea में रक्षा मंत्री कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे। भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रक्षा उत्पादन, अत्याधुनिक सैन्य तकनीक, जहाज निर्माण और “मेक इन इंडिया” पहल के तहत सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। दोनों देशों के बीच पहले से विशेष रणनीतिक साझेदारी मौजूद है और हाल के वर्षों में रक्षा उद्योग से जुड़े सहयोग में भी तेजी आई है। दक्षिण कोरिया की रक्षा कंपनियां भारत में निवेश और संयुक्त उत्पादन परियोजनाओं में लगातार रुचि दिखा रही हैं। इस यात्रा के दौरान रक्षा निर्माण, लॉजिस्टिक सहयोग और नई तकनीकों के आदान-प्रदान को लेकर भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
रवाना होने से पहले Rajnath Singh ने कहा कि यह दौरा क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था, समुद्री सुरक्षा और साझा रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की बढ़ती सक्रियता और दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के बीच भारत का यह दौरा काफी रणनीतिक महत्व रखता है। इस यात्रा के जरिए भारत न केवल अपनी रक्षा कूटनीति को मजबूत करेगा, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सामरिक मौजूदगी और प्रभाव को भी और अधिक सशक्त बनाने की कोशिश ।




