देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने मंगलवार को पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर तक इजाफा किया, जिससे आम लोगों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। यह एक हफ्ते के भीतर दूसरी बार है जब ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। इससे पहले 15 मई को भी पेट्रोल और डीजल के दामों में लगभग 3 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि हुई थी। लगातार बढ़ रही कीमतों ने परिवहन, व्यापार और घरेलू बजट पर असर डालना शुरू कर दिया है।
नई दरों के लागू होने के बाद दिल्ली में पेट्रोल करीब 98.64 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। मुंबई, कोलकाता और चेन्नई सहित देश के अन्य बड़े शहरों में भी ईंधन महंगा हुआ है। राज्यों में वैट और स्थानीय टैक्स अलग-अलग होने के कारण कीमतों में कुछ अंतर देखने को मिल रहा है। तेल कंपनियां प्रतिदिन सुबह 6 बजे नई कीमतें जारी करती हैं, जिसके बाद संशोधित दरें लागू होती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से घरेलू बाजार में ईंधन महंगा हो रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं ने वैश्विक तेल बाजार में दबाव बढ़ाया है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों का सीधा असर देश में पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ता है।
सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखने की वजह से उन्हें भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा था। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों पर अंडर-रिकवरी का दबाव लगातार बढ़ रहा था, जिसके चलते कीमतों में चरणबद्ध तरीके से संशोधन किया जा रहा है। कंपनियों का तर्क है कि वैश्विक बाजार में महंगे कच्चे तेल के बावजूद लंबे समय तक घरेलू कीमतों को नियंत्रित रखना संभव नहीं था।
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिखाई देने लगा है। परिवहन लागत बढ़ने से सब्जियों, खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों में भी तेजी आने की आशंका जताई जा रही है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में महंगाई दर और बढ़ सकती है। विपक्षी दलों ने इस फैसले को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है और तुरंत कीमतें कम करने की मांग की है, जबकि सरकार का कहना है कि यह फैसला वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा बाजार के दबाव को देखते हुए लिया गया है।




