उत्तर प्रदेश सरकार ने आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट बैठक में OBC आरक्षण के लिए “समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग” के गठन को मंजूरी दे दी गई। यह आयोग पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण का नया आधार तय करेगा और छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से पंचायत चुनावों में आरक्षण को लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी और प्रशासनिक अड़चनें दूर हो सकेंगी।
सरकार के अनुसार आयोग की अध्यक्षता हाईकोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी जाएगी। इसके अलावा आयोग में सामाजिक न्याय, प्रशासन और पिछड़ा वर्ग मामलों के जानकार विशेषज्ञों को सदस्य बनाया जाएगा। आयोग पंचायत स्तर पर OBC समुदाय की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्थिति का विस्तृत अध्ययन करेगा। इसके तहत ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायतों में पिछड़े वर्ग की भागीदारी, जनसंख्या और प्रतिनिधित्व का विश्लेषण किया जाएगा।
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए “ट्रिपल टेस्ट” नियम के अनुरूप लिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि स्थानीय निकाय चुनावों में OBC आरक्षण लागू करने से पहले राज्य सरकारों को एक समर्पित आयोग बनाकर पिछड़े वर्ग की वास्तविक स्थिति का अध्ययन कराना होगा। इसके बाद ही आरक्षण का प्रतिशत और सीटों का निर्धारण किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार अब इसी प्रक्रिया को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है ताकि भविष्य में आरक्षण व्यवस्था को लेकर कोई कानूनी विवाद न हो।
सूत्रों के अनुसार आयोग यह भी तय करेगा कि प्रदेश के किन क्षेत्रों में OBC वर्ग को कितना आरक्षण मिलना चाहिए। सरकार ने संकेत दिए हैं कि आरक्षण आबादी के अनुपात और प्रतिनिधित्व की स्थिति के आधार पर तय किया जाएगा, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। आवश्यकता पड़ने पर आयोग स्वतंत्र सर्वेक्षण और डेटा संग्रहण का कार्य भी करा सकेगा।
राजनीतिक रूप से भी इस फैसले को बेहद अहम माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव लंबे समय से OBC आरक्षण के मुद्दे पर अटके हुए थे। पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन आरक्षण संबंधी कानूनी पेचीदगियों के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाया। अब आयोग के गठन के बाद माना जा रहा है कि पंचायत चुनावों का रास्ता साफ हो जाएगा।
सरकार का कहना है कि आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद नई आरक्षण सूची और सीटों के रोटेशन की प्रक्रिया लागू की जाएगी। इसके बाद ही पंचायत चुनावों की अंतिम अधिसूचना जारी होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह फैसला ग्रामीण राजनीति में OBC समुदाय की भागीदारी को मजबूत करने के साथ-साथ आगामी चुनावी समीकरणों पर भी बड़ा असर डाल सकता है।




