पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष को लेकर एक बड़ी रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अमेरिकी कांग्रेस से जुड़ी एक रक्षा रिपोर्ट के अनुसार इस युद्ध में अमेरिका के कम से कम 42 विमान और ड्रोन नष्ट हुए या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। इनमें अत्याधुनिक F-35 और F-15 लड़ाकू विमान, MQ-9 रीपर ड्रोन, KC-135 एयर टैंकर और AWACS निगरानी विमान जैसे महत्वपूर्ण सैन्य उपकरण शामिल बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यह नुकसान अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए गए बड़े सैन्य अभियान के दौरान हुआ।
बताया जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल ने फरवरी 2026 के अंत में ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाते हुए संयुक्त अभियान शुरू किया था। इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों की तीव्रता बढ़ा दी। कई रक्षा विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ईरान के आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम ने अमेरिकी विमानों को निशाना बनाया, जबकि कुछ विमान “फ्रेंडली फायर” यानी अपने ही सहयोगी बलों की गलती से भी प्रभावित हुए। विशेष रूप से MQ-9 रीपर ड्रोन और एयर टैंकर विमानों को भारी नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है।
रिपोर्टों के अनुसार इस संघर्ष में अमेरिकी सैन्य उपकरणों को हुए नुकसान की कुल कीमत करीब 2.3 से 2.8 अरब डॉलर के बीच आंकी गई है। इसके अलावा अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की खबरें भी सामने आई हैं। कई सैनिकों की मौत और सैकड़ों के घायल होने का दावा किया गया है। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि उनके सैन्य अभियानों ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च क्षमता में लगभग 90 प्रतिशत तक कमी आई है।
दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर पश्चिम एशिया में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि दोबारा हमला किया गया तो उसका जवाब पहले से अधिक आक्रामक होगा। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका आगे भी सैन्य कार्रवाई कर सकता है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी यह संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर डाल सकता है। खासतौर पर होरमुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ गई है। यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर दुनिया भर में तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों पर देखने को मिल सकता है।




