ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म के विरोध में आज देशभर के केमिस्ट और ड्रगिस्ट संगठनों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इस बंद का नेतृत्व ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) कर रहा है। संगठन का दावा है कि देशभर के लाखों मेडिकल स्टोर इस हड़ताल में शामिल हो सकते हैं, जिसके कारण कई राज्यों में दवाओं की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका है। हड़ताल का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियम लागू कराने और ई-फार्मेसी कंपनियों की कार्यप्रणाली के खिलाफ विरोध दर्ज कराना बताया जा रहा है।
केमिस्ट संगठनों का आरोप है कि कई ऑनलाइन फार्मेसी प्लेटफॉर्म बिना पर्याप्त निगरानी और सही प्रिस्क्रिप्शन जांच के दवाएं बेच रहे हैं। उनका कहना है कि इससे नकली दवाओं की बिक्री, एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल और नशे वाली दवाओं के दुरुपयोग का खतरा बढ़ रहा है। संगठन ने सरकार से GSR 220(E) और GSR 817(E) जैसी अधिसूचनाओं को वापस लेने की मांग की है। फार्मासिस्टों का कहना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान दवाओं की होम डिलीवरी के लिए लागू किए गए नियमों का अब ई-फार्मेसी कंपनियां व्यावसायिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही हैं।
हड़ताल कर रहे दवा विक्रेताओं ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म द्वारा भारी छूट दिए जाने पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि बड़ी ई-फार्मेसी कंपनियां 25 से 40 प्रतिशत तक की छूट देकर छोटे मेडिकल स्टोरों के कारोबार को नुकसान पहुंचा रही हैं। इससे पारंपरिक दवा दुकानदारों की आय प्रभावित हो रही है और लाखों लोगों की आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है। केमिस्ट संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए स्पष्ट और सख्त नियम नहीं बनाए गए तो छोटे मेडिकल स्टोरों के लिए बाजार में टिके रहना मुश्किल हो जाएगा।
हालांकि केंद्र सरकार और कई राज्य स्तरीय फार्मेसी संगठनों ने आश्वासन दिया है कि जरूरी दवाओं और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता पूरी तरह बाधित नहीं होने दी जाएगी। कई राज्यों में अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर खुले रखने का निर्णय लिया गया है ताकि मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े। कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के फार्मेसी संगठनों ने इस हड़ताल से दूरी भी बनाई है। इसके बावजूद कर्नाटक, पंजाब, बिहार, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिल सकता है। स्थानीय प्रशासन और ड्रग कंट्रोल विभागों ने आवश्यक दवाओं की आपूर्ति बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और विशेष निगरानी के इंतजाम किए हैं।
केमिस्ट संगठनों का कहना है कि जब तक ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर स्पष्ट नीति और कड़े नियमन लागू नहीं किए जाते, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। वहीं मरीजों और आम लोगों को सलाह दी गई है कि वे जरूरत की दवाएं पहले से खरीदकर रखें ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।




